Telangana CM Revanth Reddy Performed Varuna Yagna of Rain: मानसून में पूरे देश के कई राज्यों में बारिश हाहाकर मचाए हुए है। भारी बारिश के कारण पहाड़ी राज्यों समेत गुजरात और महाराष्ट्र में भारी तबाही हुई है। वहीं तेलंगाना अभी भी अच्छी बारिश के तरस रहा है। बारिश नहीं होने से किसान और सरकार दोनों परेशान है। अब बारिश करवाने के लिए तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार प्राचीन काल के उपायों का सहारा ले रही है। इसी के तहत कांग्रेस सीएम रेवंत रेड्डी ने वैदिक विधि से वरुण यज्ञ कर तेलंगाना में अच्छी बारिश की कामना की।

सीएम के अलावे सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी और उनकी पत्नी एवं विधायक एन. पद्मावती ने सुबह यज्ञ के अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी बाद में यज्ञ के समापन कार्यक्रम यानी पूर्णाहुति में शामिल हुए।

सीएम रेवंत रेड्डी ने नलगोंडा जिले के नागार्जुन सागर में कृष्णा नदी के किनारे ‘वरुण यज्ञ’ में भाग लिया। इस धार्मिक अनुष्ठान में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पत्नी संग शामिल हुए। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान वरुण से राज्य में पर्याप्त वर्षा की प्रार्थना की गई। 108 पुजारियों और वैदिक विद्वानों ने हिस्सा लिया। इसके लिए 11 हवन कुंड बनाए गए। अनुष्ठान की शुरुआत सुबह करीब 4 बजे ‘गो पूजा’ से हुई।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है कि मैंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर ‘वरुण यज्ञ’ के पूर्णाहुति कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह आयोजन इस उम्मीद के साथ किया गया था कि राज्य में भरपूर बारिश हो और किसानों के जीवन में खुशहाली आए। हमने यदागिरिगुट्टा श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर के पुजारियों और वैदिक विद्वानों की देखरेख में यह ‘वरुण यज्ञ’ किया, जिसमें 108 ऋत्विक यानी कि आचार्य और 11 होम कुंड शामिल थे। सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा कि उन्होंने कामना की है कि कृष्णा और गोदावरी नदियों के किनारे वाले इलाकों में खूब बारिश हो और वहां के तालाब और जलाशय भर जाएं। फसलें भरपूर हो. किसानों को उनकी मेहनत का उचित फल मिले।

तेलंगाना में बारिश की कमी, खाली पड़े हैं जलाशय

बता दें कि इस वर्ष तेलंगाना में अच्छी बारिश अबतक नहीं हुई है। इससे सरकार के सामने गंभीर चुनौती बन गई है। कम बारिश का सीधा असर किसानों और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ रहा है। सरकार ने संभावित अल नीनो प्रभाव को ध्यान में रखते हुए एक विशेषज्ञ समिति भी बनाई थी। समिति ने सरकार को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा देने, उनकी सब्सिडी बढ़ाने और कम पानी में तैयार होने वाली सूखा-रोधी फसलों को प्रोत्साहित करने जैसे सुझाव दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कृष्णा और गोदावरी बेसिन के ज़्यादातर हिस्सों में काफ़ी पानी आने के बावजूद ज़्यादा पानी जमा करने की क्षमता वाले बांध अभी भी पूरी तरह नहीं भरे हैं। इस सीज़न में अब तक सिर्फ़ जुराला, कड्डम और येल्लमपल्ली प्रोजेक्ट्स में ही ज़रूरत से ज़्यादा पानी जमा हुआ है।

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