अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान के परमाणु ठिकानों को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान के परमाणु केंद्र इतने बुरी तरह नष्ट हो चुके हैं कि वहां से रेडियोएक्टिव सामग्री यानी ‘न्यूक्लियर डस्ट’ निकालना भी अब उसके लिए संभव नहीं रह गया है। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि भारी बमबारी के कारण परमाणु सामग्री जमीन के बेहद गहरे हिस्सों में दब चुकी है। उनके अनुसार, ईरान के पास अब उसे सुरक्षित बाहर निकालने की तकनीकी और ऑपरेशनल क्षमता नहीं बची है।

‘ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे’

ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि आगे की कार्रवाई को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और यह आने वाली रणनीतिक बातचीत तथा संभावित समझौतों पर निर्भर करेगा। उन्होंने संकेत दिए कि अमेरिकी प्रशासन ईरान को लेकर कई सैन्य और कूटनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहा है।

व्हाइट हाउस से ट्रंप की चेतावनी

व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी सेना के वरिष्ठ जनरलों का एक बड़ा समूह अगले आदेश का इंतजार कर रहा है। उनके इस बयान को ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

ईरान के युद्धविराम प्रस्ताव को भी किया खारिज

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक प्रस्ताव भेजा था, लेकिन ट्रंप ने उसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए ठुकरा दिया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा: “मैंने ईरान के तथाकथित प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।” ट्रंप ने ईरान पर दशकों से अमेरिका के साथ “खेल खेलने” का आरोप भी लगाया और कहा कि अब हालात बदल चुके हैं।

कैसे शुरू हुआ संघर्ष?

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के कई रणनीतिक और परमाणु ठिकानों पर बड़े हमले किए थे। इसके बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि 8 अप्रैल को युद्धविराम पर सहमति बनने के बाद बड़े हमले रुक गए, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की बातचीत जारी है, मगर स्थायी शांति की राह फिलहाल मुश्किल दिखाई दे रही है।

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