आजमगढ़. दूसरों से आगे निकलने की होड़ में परेशान होने के बजाय अपने ही पिछले प्रदर्शन को चुनौती देना चाहिए. जीवन में असली प्रतियोगिता दूसरों से नहीं, बल्कि खुद से है. हर दिन अगर व्यक्ति अपने कल से बेहतर करने की कोशिश करे तो सफलता की राह आसान हो जाती है. राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने मंगलवार को महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ के तृतीय दीक्षोत्सव में विद्यार्थियों को सफलता का यही मंत्र दिया.

अपने सम्बोधन में राज्यपाल ने कहा कि डिग्री हासिल करना शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि सीखने की एक नई शुरुआत है. बदलती तकनीक और तेजी से बदलती दुनिया में वही युवा आगे बढ़ेंगे, जो लगातार कुछ नया सीखने के लिए तैयार रहेंगे. राज्यपाल ने दीक्षोत्सव में विद्यार्थियों को अनुशासन, नैतिकता, मेहनत और निरंतर सीखने का संदेश दिया.

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उन्होंने कहा कि रास्ते में कई तरह के आकर्षण और परेशानियां आएंगी, लेकिन विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य से भटकना नहीं चाहिए. खासतौर पर दूसरों से अपनी तुलना करना सबसे बड़ा डिस्ट्रैक्शन है. इससे व्यक्ति अनावश्यक दबाव में आ सकता है. इसके बजाय अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने और अपनी उपलब्धियों को लगातार बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए.

उन्होंने उच्च शिक्षा में बेटियों की बढ़ती भागीदारी को उत्साहजनक बताया, लेकिन साथ ही बेटों की शिक्षा और उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत बताई. उन्होंने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में रोजगारपरक सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स शुरू करने पर जोर दिया, ताकि युवा शिक्षा के साथ कौशल हासिल कर आत्मनिर्भर बन सकें.

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राज्यपाल ने विद्यार्थियों से दहेज, बाल विवाह, घरेलू हिंसा और लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने का आह्वान किया. उन्होंने नशे से दूर रहने, अनुशासित जीवन जीने और डिजिटल तकनीक का सकारात्मक इस्तेमाल करने की सलाह दी.

दीक्षोत्सव में पद्मविभूषण पं. हरिप्रसाद चौरसिया ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया. उन्होंने सफलता के लिए निरंतर अभ्यास, धैर्य और समर्पण को जरूरी बताया. दीक्षोत्सव में 63,071 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं. इनमें 42,724 छात्राएं और 20,347 छात्र शामिल रहे. वहीं बेहतर प्रदर्शन करने वाले 74 विद्यार्थियों को 88 पदक प्रदान किए गए. पदक हासिल करने वालों में 48 छात्राएं और 26 छात्र रहे.