गया। बिहार कांग्रेस के भीतर गहराता असंतोष अब खुले विद्रोह का रूप ले रहा है। संगठन की बदहाली और नेतृत्व की कार्यशैली से नाराज समर्पित कांग्रेसियों ने 17 मार्च 2026 को पटना में एक महासम्मेलन बुलाने का निर्णय लिया है। गया के सर्किट हाउस में मीडिया से बात करते हुए खगड़िया के पूर्व विधायक छत्रपति यादव ने प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए संगठन की गिरती स्थिति पर चिंता जताई।
नेतृत्व पर भ्रष्टाचार और उपेक्षा के आरोप
पूर्व विधायक ने सीधे तौर पर बिहार के प्रभारी कृष्णा वलरू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण में भारी धांधली हुई और पैसे लेकर टिकट बेचे गए। कार्यकर्ताओं का मानना है कि शीर्ष पदों पर बैठे कुछ चेहरों की गलत नीतियों के कारण ही पार्टी आज अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रही है।
संगठन को बचाने की कवायद
महासम्मेलन का मुख्य उद्देश्य राहुल गांधी तक जमीनी सच्चाई पहुंचाना और संगठन को नई दिशा देना है। अभियान के आयोजकों, जिनमें नागेंद्र पासवान विकल और कई पूर्व पदाधिकारी शामिल हैं, का कहना है कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि कांग्रेस की खोई हुई साख वापस लाने के लिए है।
जनसंपर्क अभियान की शुरुआत
इस सम्मेलन की सफलता के लिए 7 फरवरी 2026 से पूरे राज्य में व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया गया है। नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि पटना की आवाज दिल्ली तक नहीं पहुंची, तो पुराने कांग्रेसी दिल्ली कूच कर अपनी बात रखेंगे। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आलाकमान ने इस असंतोष को समय रहते नहीं सुलझाया, तो बिहार में कांग्रेस का भविष्य और अंधकारमय हो सकता है।
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