नालंदा। जिले में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बिगुल फूंक दिया है। पार्टी ने मनरेगा योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने और बजट में कटौती के विरोध में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार का यह कदम न केवल राष्ट्रपिता का अपमान है, बल्कि गरीबों के पेट पर लात मारने जैसा है।
गांधी का नाम हटाना देश का दुर्भाग्य
जिला कांग्रेस अध्यक्ष नरेश प्रसाद अकेला ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि जिस महापुरुष ने देश को आजादी दिलाई, आज उनके नाम को ही योजनाओं से मिटाया जा रहा है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह सिर्फ नाम बदलने की राजनीति नहीं, बल्कि गरीबों के अधिकारों को छीनने की साजिश है।
बजट कटौती से गहराया संकट
कांग्रेस ने केंद्र और राज्यों के बीच मनरेगा के वित्तीय ढांचे में बदलाव पर गंभीर चिंता जताई है।
पुराना नियम: केंद्र 90% और राज्य 10% फंड देता था।
नया नियम: अब केंद्र 60% और राज्य को 40% हिस्सा देना होगा।
अकेला ने तर्क दिया कि बिहार जैसे राज्यों के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वे 40% खर्च वहन कर सकें। इससे मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिल पाएगी और योजना दम तोड़ देगी।
दिल्ली तक कूच करने की तैयारी
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि मनरेगा में महात्मा गांधी का नाम पुनः जोड़ा जाए और पुराना ’90-10′ का फार्मूला बहाल किया जाए। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने ये फैसले वापस नहीं लिए, तो आंदोलन जिला मुख्यालय से शुरू होकर पटना और फिर दिल्ली की सड़कों तक पहुंचेगा।
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