रायपुर। छत्तीसगढ़ में विदेशी बियर की सप्लाई में बड़ा झोल का मामला एक बार फिर से चर्चे में है। आबकारी विभाग की जांच में पाया गया कि राजनांदगांव में रोक के बावजूद “सुपर स्ट्रांग 7 हिल्स 500 एमएल” बियर बेची गई। मामले की जांच के बाद मुख्य विक्रेता कैलाश देवांगन को सेवा से पृथक करने और ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं प्रीमियम मदिरा दुकान राजदीप इंटरप्राइजेस के प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

जानकारी के अनुसार, राजनांदगांव की सरकारी मदिरा दुकान में बियर के लेबल और रैपर बदलकर बिक्री की गई। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा गया कि सुपर स्ट्रांग 7 हिल्स 500 एमएल कैन में असल में “गोल्डन प्राइड प्रीमियम लेगर बियर” भरी हुई थी। जांच में पता चला कि इस बियर का निर्माण 15 अक्टूबर 2025 को हुआ था और इसकी वैधता 13 अप्रैल 2026 तक थी।

आबकारी विभाग के रोक के बावजूद बिक्री करने पर कार्रवाई करते हुए मुख्य विक्रेता कैलाश देवांगन को सेवा से पृथक करने और ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया आरंभ की है। साथ ही दुकान प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

जानकारी यह भी सामने आई है कि मनपसंद ऐप पर सुपर स्ट्रांग 7 हिल्स 500 एमएल कैन उपलब्ध था, जिसे युवक ने ख़रीदा। उसके बाद लेबल और रैपर बदलकर बियर बेचने का मामला उजागर हुआ और सोशल मीडिया पर वीडियो काफी वायरल हुआ।

निर्माता कंपनी ने किया था बड़ा झोल

सबसे पहले आबकारी विभाग ने 17 नवंबर 2025 को सूरजपुर जिले की लटोरी और रायगढ़ जिले की बड़ेरामपुर विदेशी मदिरा दुकानों में निरीक्षण के दौरान बियर कैन में गड़बड़ी पाई थी। जांच में पाया गया कि “सुपर स्ट्रांग 7 हिल्स 500 एमएल” कैन से लेबल हटाने पर अंदर “गोल्डन बर्ड प्रीमियम लेगर बियर” का प्रिंट दिखाई दे रहा था। यह बियर माइकल ब्रेवरेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित बताई गई। मामले की पुष्टि होने के बाद आबकारी विभाग ने राज्य के सभी गोदामों से संबंधित बियर की सप्लाई रोक दी और प्रदेश की सभी विदेशी मदिरा दुकानों में इस ब्रांड की बिक्री पर रोक लगा दी। वहीं कंपनी को शराब दुकानों से बचे हुए स्टॉक्स को वापस ले जाने भी निर्देश दिए गए हैं। हालांकि अभी तक कंपनी ने बियर की पेटियों का पूरी तरह से उठाव नहीं किया है।

आबकारी आयुक्त कार्यालय ने इसे छत्तीसगढ़ एक्साइज एक्ट 1915 और विदेशी मदिरा नियम 1996 के उल्लंघन के रूप में माना और कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कंपनी से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा गया। विभाग को कंपनी की ओर से प्राप्त जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर 7 जनवरी 2026 को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिया गया। सुनवाई के बाद आबकारी विभाग ने कंपनी पर 1.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।