चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से हिन्दू पंचांग के अनुसार नवसंवत्सर की शुरुआत होती है. वर्ष 2026 में यह तिथि 19 मार्च, गुरुवार को पड़ रही है. इसी दिन से संवत्सर 2083 का आरंभ होगा. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस वर्ष के राजा गुरु और मंत्री मंगल रहेंगे. किसी भी वर्ष में राजा और मंत्री ग्रहों की स्थिति पूरे साल की दशा और दिशा तय करती है. गुरु का राजा होना अपेक्षाकृत शुभ माना जाता है, जबकि मंगल मंत्री पद पर होने से कुछ उग्र परिणाम भी सामने आ सकते हैं. ज्योतिष गणना के अनुसार इस बार हिन्दू नववर्ष की शुरुआत कालसर्प योग में हो रही है. सामान्यतः कालसर्प योग को चुनौतीपूर्ण और बाधाओं से भरा माना जाता है. इसका प्रभाव कृषि, मौसम और अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे सकता है. विशेषकर किसानों के लिए यह वर्ष संघर्षपूर्ण रह सकता है. वर्षा की स्थिति सामान्य से कम रहने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे अल्पवृष्टि की संभावना व्यक्त की जा रही है.

वर्ष पूरी तरह नकारात्मक नहीं रहेगा
संवत्सर 2083 का नाम रौद्र है. जिसे भगवान शिव के उग्र स्वरूप का प्रतीक माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार रौद्र संवत्सर में प्राकृतिक आपदाओं, अग्नि प्रकोप और असामान्य घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है. पृथ्वी से जुड़े संसाधनों जैसे खनिज उत्पादन में कमी देखी जा सकती है. शासन व्यवस्था में कठोरता का भाव भी देखने को मिल सकता है. हालांकि संवत्सर का नाम उग्र है, लेकिन इस वर्ष के राजा गुरु हैं, जिन्हें ज्ञान, धर्म और न्याय का प्रतीक माना जाता है. उनके प्रभाव से वर्ष पूरी तरह नकारात्मक नहीं रहेगा. कृषि और शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं और वर्षा औसत स्तर की रहने की संभावना जताई जा रही है. कुल मिलाकर परिणाम मिले-जुले रहने की संभावना है.
कब बनाता है कालसर्प योग
मंगल के मंत्री पद पर होने से वर्ष में ऊर्जा के साथ उग्रता और विवाद की स्थितियां बन सकती हैं. ज्योतिष के अनुसार इससे रोग, दुर्घटनाएं और अग्नि संबंधी घटनाओं में वृद्धि हो सकती है. धार्मिक गतिविधियों में बढ़ोतरी और कर्मकांड के प्रति लोगों की रुचि बढ़ने की भी संभावना है. ग्रहों की वर्तमान स्थिति के अनुसार केतु सिंह राशि में स्थित है. कुंभ राशि में राहु के साथ मंगल, बुध और सूर्य विराजमान हैं, जबकि मीन राशि में शनि और शुक्र स्थित हैं. जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच लगभग 180 डिग्री के हिस्से में आ जाते हैं, तब कालसर्प योग बनता है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस योग का प्रभाव केवल व्यक्तियों पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पड़ सकता है.
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