रायपुर। जैसे-जैसे नक्सलवाद खत्म होने की तय समय सीमा (31 मार्च) करीब आ रही है, वैसे-वैसे नक्सली गतिविधियों में तेजी से कमी आती जा रही है. नक्सलियों के आत्मसमर्पण के साथ-साथ सुरक्षाबलों की सक्रियता से कम हो रही नक्सली गतिविधियों की वजह से अब लोग बिना किसी डर-भय के सुदूर आदिवासी अंचलों में जा पा रहे हैं, जहां चंद सालों पहले जाना दुश्कर हो गया था. इनमें से एक भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और कोंडागांव की विधायक लता उसेंडी भी शामिल हैं, जो 32 साल बाद अपने गांव पहुंची, जहां उन्होंने बचपन बिताया था.

लता उसेंडी ने 32 साल बाद अपने गांव की यात्रा का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर साझा किया है. पूर्व मंत्री लता उसेंडी ने बताया कि 35 साल बाद मैं उस गांव में हूँ जहां मेरा बचपन बीता है. ग्राम पंचायत “बेचा” जिसकी मिट्टी में खेल कर इसकी नदी का स्वच्छ जल पी कर यहाँ के लोगो के साथ घुल मिल कर हम बड़े हुए.
हमारे परिवार का एक स्वर्णिम समय यहाँ हमारे पूज्य पिता जी स्व श्री मंगल राम उसेण्डी जी के साथ बीता . अनेकों बार इच्छा सताती थी कि बेचा जाऊ, वहाँ कुछ समय बिताऊ, वहाँ रह रहे अपने लोगो से मिले. मगर नक्सल आतंक ने हमसे हमारे बचपन की और पूज्य पिता जी के साथ जुड़ी यादों से दूर कर रखा था.

नक्सली आतंक ने ग्राम पंचायत बेचा की तरह सैकड़ो गांवों को निगल रखा था.यहाँ के लोगो के हिस्से की सुख सुविधाए सड़के शिक्षा स्वास्थ छीन रखा था. नमन है श्री नरेंद्र मोदी जी श्री अमित शाह जी के दृणसंकल्प को जिनके नेतृत्व में हमारे मुखिया श्री विष्णु देव साय जी व हमारे ऊर्जावान उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री श्री विजय शर्मा जी कंधे से कंधा मिला कर नक्सली समस्या के जड़ से खात्मे का कार्य कर रहे हैं, और यह कार्य अब पूर्णतः की ओर है.
कोटि कोटि नमन है उन वीर बलिदानियों को उन शहीदों को जिन्होंने बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ को सुरक्षित बनाने के लिए नक्सलवाद की जंग में अपने रक्त का अंतिम कतरा बहा कर अपनी अंतिम स्वास भी न्योछावर कर दी. अब नक्सलवाद अंतिम सांसे ले रहा है. ग्राम पंचायत बेचा के साथ साथ नक्सल पीड़ित सभी गांवों में जल्द ही विकास की लहर आएगी. नक्सल का अंधेरा छट रहा है विकास का सूर्योदय होने वाला है.
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