पटना। राज्यसभा चुनाव के दौरान बिहार कांग्रेस के भीतर मची रार अब सार्वजनिक हो गई है। तीन विधायकों की अनुपस्थिति ने न केवल महागठबंधन के समीकरण बिगाड़े हैं, बल्कि पार्टी के भीतर ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ और गुटबाजी की पोल भी खोल दी है। इस पूरे विवाद के केंद्र में अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम भी आ गए हैं।

​प्रदेश अध्यक्ष पर लगे गंभीर आरोप

​वोटिंग से दूर रहने वाले फारबिसगंज विधायक मनोज विश्वास ने एक बड़ा धमाका करते हुए कहा कि उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के कहने पर ही राजद प्रत्याशी अमरेंद्र धारी सिंह को वोट नहीं दिया। विश्वास का दावा है कि 5 मार्च से शुरू हुई चुनाव प्रक्रिया में राजेश राम की लगातार उपेक्षा हो रही थी, जिससे नाराज होकर अध्यक्ष ने ही उन्हें अनुपस्थित रहने का निर्देश दिया था।

​राजेश राम का पलटवार

​इन आरोपों को खारिज करते हुए राजेश राम ने मनोज विश्वास पर गद्दारी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, मैंने व्यक्तिगत रूप से उनके घर जाकर वोट देने का आग्रह किया था ताकि गलत संदेश न जाए। लेकिन भाजपा के प्रभाव में आकर उन्होंने झूठ का सहारा लिया है। राम ने इसे पार्टी के कुछ अन्य नेताओं की साजिश करार देते हुए खुद को जन्मजात कांग्रेसी बताया।

​विधायकों के अपने तर्क

​अनुपस्थित रहे अन्य दो विधायकों ने अपनी कार्रवाई को सैद्धांतिक जामा पहनाने की कोशिश की है:

​सुरेंद्र कुशवाहा (वाल्मीकिनगर): इन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई हमेशा अगड़ी जातियों के वर्चस्व के खिलाफ रही है। राजद द्वारा अमरेंद्र धारी सिंह को टिकट दिए जाने से वे नाराज थे। उन्होंने हिना शहाब को टिकट न मिलने पर भी सवाल उठाए।

​मनोहर प्रसाद सिंह (मनिहारी): इन्होंने तर्क दिया कि महागठबंधन का आधार वोट बैंक पिछड़ा, दलित और आदिवासी समाज है। इन वर्गों की अनदेखी कर एक सवर्ण को प्रत्याशी बनाना न्यायसंगत नहीं था, इसी असमंजस में उन्होंने मतदान नहीं किया।

​सड़कों पर उतरा कार्यकर्ताओं का गुस्सा

​इस बीच, कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। पटना स्थित सदाकत आश्रम के बाहर बड़ी संख्या में कांग्रेसी जुटे और एनडीए सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुतला दहन किया। कार्यकर्ताओं ने अपनी ही पार्टी के बागी विधायकों को ‘वोट चोर’ और ‘विधायक चोर’ जैसे नारों से संबोधित किया।