पटना। पश्चिम एशिया (इजरायल-इरान) में जारी युद्ध की गूंज अब बिहार की रसोई और होटलों के मेन्यू में सुनाई दे रही है। पिछले 21 दिनों से अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के कारण राज्य में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत हो गई है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ा है, पटना से लेकर गया और भागलपुर तक खाने-पीने की चीजों के दाम 20% से 50% तक बढ़ गए हैं।

​पटना: मेन्यू से गायब हुआ दम वाला खाना

​राजधानी पटना के प्रतिष्ठित होटलों, जैसे पनाश, ने अपने मेन्यू में बड़े बदलाव किए हैं। मटन जैसी डिशेज, जिन्हें पकने में अधिक गैस और समय लगता है, उन्हें फिलहाल बंद कर दिया गया है। होटलों ने रात 11 बजे के बाद किचन सेवा बंद कर दी है और अब कोयले के चूल्हे, तंदूर तथा इंडक्शन पर निर्भरता बढ़ गई है। जहां 5 रुपये की कट चाय अब 10 रुपये की हो गई है, वहीं 80 रुपये की थाली के लिए ग्राहकों को 120 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। हालांकि, जिन प्रतिष्ठानों के पास PNG कनेक्शन है, वहां स्थिति अभी सामान्य है।

​गया और भागलपुर: डीजल भट्ठी और कोयले का सहारा

​गयाजी में गैस की किल्लत इतनी बढ़ गई है कि दुकानदारों ने डीजल से चलने वाली भट्टियों का इंतजाम शुरू कर दिया है। भागलपुर में होटल पूरी तरह कोयले पर शिफ्ट हो गए हैं। मालिकों का कहना है कि गैस सिलेंडर न मिलने के कारण प्रति थाली 10 से 20 रुपये की बढ़ोतरी मजबूरी बन गई है। दिलचस्प बात यह है कि कारीगर अब कोयले के चूल्हे पर काम करने से कतरा रहे हैं, जिससे लेबर संकट भी खड़ा हो गया है।

​नालंदा: लकड़ी के चूल्हे से बढ़ा वेटिंग टाइम

​नालंदा के बिहारशरीफ में गैस न मिलने के कारण बिरयानी और मिठाइयां लकड़ी के चूल्लों पर बनाई जा रही हैं। दुकानदारों का कहना है कि लकड़ी पर खाना पकाने में गैस की तुलना में दोगुना समय लग रहा है, जिससे ग्राहकों को ऑर्डर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, गैस संकट का फायदा उठाकर कोयला माफियाओं ने भी दाम 14 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपये प्रति किलो कर दिए हैं।