हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में शादी के नाम पर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला पर नकली शादी का नाटक कर युवक से जेवर और नकदी हड़पने का आरोप लगा है। पुलिस कार्रवाई नहीं होने पर मामला कोर्ट पहुंचा तो जिला कोर्ट इंदौर ने सख्त रुख अपनाते हुए एमआईजी थाना पुलिस से एक्शन टेकन रिपोर्ट तलब कर ली है।

फिल्मी स्टाइल में ‘डोली’ नहीं ‘लूट’ की लिखी कहानी

बताया जा रहा है कि मामला एमआईजी क्षेत्र के रहने वाले मनोज कुमार से जुड़ा है, जिनके साथ कथित तौर पर फिल्मी स्टाइल में “डोली” नहीं बल्कि “लूट” की कहानी लिख दी गई। पीड़ित के वकील हाईकोर्ट एडवोकेट कृष्ण कुमार कुन्हारे और डॉ रूपाली राठौर के अनुसार सागर की रहने वाली आरती नाम की महिला ने शादी का झांसा देकर 19 नवंबर 2019 को पीड़ित और उसकी मां को सागर बुलाया और वहां शादी की बात कहकर कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए। बाद में उन्हीं कागजों को वैवाहिक पंचनामा बताकर खुद को पत्नी घोषित कर दिया।

संबंध बनाने से बचने के लिए बनाती रही बहाना

आरोप है कि महिला ने शादी के नाम पर चांदी की पायल, करधनी, बिछिया, सोने का मंगलसूत्र और करीब 40 हजार रुपए की एफडी ले ली। इसके बाद वह इंदौर आकर पीड़ित के घर रहने लगी, लेकिन हर बार वैवाहिक संबंध बनाने से बचती रही और कभी सामाजिक रस्मों का बहाना तो कभी बीमारी का बहाना बनाकर दूरी बनाए रखी।

जेवर और कैश लेकर फरार

पीड़ित के मुताबिक महिला नवंबर 2019 से अगस्त 2020 तक उसके घर पर रही और लॉकडाउन के दौरान भी साथ रही, लेकिन 15 अगस्त 2020 को मां की तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर सागर चली गई और फिर वापस नहीं लौटी। बाद में घर में रखे जेवर और करीब 30 हजार रुपए नगद भी गायब मिले। जांच में सामने आया कि जिस वैवाहिक पंचनामे के आधार पर शादी बताई जा रही थी, वह नोटरी के कागज पर बना था, जिसकी कानून में कोई मान्यता नहीं है। 

‘कागज पर हस्ताक्षर से शादी मान्य नहीं’

वकीलों ने बताया कि हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार अग्नि के सामने सात फेरे, सिंदूर, मंगलसूत्र और वैदिक रीति से विवाह होना जरूरी है, केवल कागज पर हस्ताक्षर से शादी मान्य नहीं होती। पीड़ित ने जब पुलिस में शिकायत की तो कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद जिला कोर्ट इंदौर में धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और चोरी का परिवाद पेश किया गया। मामले की गंभीरता देखते हुए कोर्ट ने एमआईजी थाने से पूछा है कि अब तक क्या कार्रवाई की गई।

कोर्ट के दखल के बाद पुलिस पर उठे सवाल

एडवोकेट रूपाली राठौर ने बताया कि केंद्र सरकार के विधि विभाग ने भी स्पष्ट कर दिया है कि नोटरी शादी या नोटरी तलाक कानूनन मान्य नहीं है और नोटरी को मैरिज ऑफिसर का अधिकार नहीं होता। इसके बावजूद इस तरह के फर्जी वैवाहिक पंचनामे बनाकर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अब कोर्ट के दखल के बाद इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं और देखने वाली बात होगी कि कथित लुटेरी दुल्हन और उसके साथियों पर कब तक कार्रवाई होती है।  

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