पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े लंबित मामलों पर कार्रवाई के बाद नई जानकारी सार्वजनिक की गई है. कई प्रविष्टियों पर निर्णय हो चुका है, जबकि शेष मामलों की प्रक्रिया जारी है. तकनीकी समस्याओं की शिकायतें भी सामने आई हैं और चुनाव से पहले प्रशासनिक सतर्कता बढ़ा दी गई है. पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल ने सोमवार शाम को कहा था कि अब तक लगभग 29 लाख नामों की जांच की जा चुकी है. यह तत्काल साफ नहीं हो सका है कि इनमें से कितने नाम पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट में रखे गए और कितने हटाए गए हैं.

भारत निर्वाचन आयोग ने सोमवार रात करीब 11:55 बजे पश्चिम बंगाल के लिए पहली सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट यानि पूरक मतदाता सूची जारी कर दी है. यह सूची उन मतदाताओं की है, जिनके नाम ‘निर्णय प्रक्रिया’ के अधीन थे और जिन पर न्यायिक अधिकारियों ने फैसला लिया है.

दरअसल निर्वाचन आयोग द्वारा 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में लगभग 60 लाख नामों को ‘विचाराधीन’ के रूप में दर्शाया गया था.  इसके बाद, इन नामों को मतदाता सूची में रखा जाए या हटाया जाए, यह निर्धारित करने के लिए 705 न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की गई थी.

इनमें से लगभग 29 लाख नामों पर अब तक फैसला हो चुका है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितने नाम पहली पूरक सूची में रखे गए और कितने हटाए गए हैं. कई लोगों ने बताया कि सूची उपलब्ध तो कराई गई थी, लेकिन उसे डाउनलोड नहीं किया जा सका.

वोटर लिस्ट देखने के लिए मतदाताओं को अपने विधानसभा क्षेत्र और बूथ की जानकारी डालकर सर्च करना होगा. देर रात लिंक जारी होने के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं ने अपना नाम खोजने की कोशिश की, लेकिन वेबसाइट पर तकनीकी खराबी के कारण कई लोग अपने बूथ की लिस्ट डाउनलोड नहीं कर पा रहे हैं. पोर्टल पर अभी तक यह नहीं दिख रहा है कि कुल कितने नाम जुड़े या हटे हैं.

पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है और 4 मई को नतीजे आएंगे. सूची जारी होने के बाद राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को भी कड़ा कर दिया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, यह सूची ECI Net ऐप समेत कई आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाएगी.

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