Ram Navami 2026 : तेलंगाना के खम्मम जिले में बसा भद्राचलम लंबे समय से आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यहां कई छोटे-बड़े मंदिर हैं, लेकिन श्री सीता रामचंद्र स्वामी मंदिर सबसे ज्यादा पहचान रखता है. इसी वजह से लोग इस शहर को दक्षिण की अयोध्या भी कहते हैं. गोदावरी नदी के किनारे बसे इस स्थान पर रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

मान्यता है कि वनवास के समय भगवान राम ने इसी क्षेत्र में कुछ समय बिताया था. भद्राचलम से करीब 32 किलोमीटर दूर पर्णशाला नाम की जगह को उस दौर से जोड़ा जाता है. यहां के बारे में कहा जाता है कि यहीं राम, सीता और लक्ष्मण रहे थे. कुछ पत्थरों को लेकर यह भी कहा जाता है कि सीता ने यहां अपने वस्त्र सुखाए थे. स्थानीय लोगों के अनुसार रावण ने सीता का हरण भी इसी इलाके से किया था.

पर्णशाला में रामायण से जुड़ी झलकियां

  1. पर्णशाला में आने वाले लोगों को कई ऐसी चीजें दिखाई जाती हैं, जिन्हें रामायण काल से जुड़ा माना जाता है. यहां सीता के पदचिन्ह बताए जाते हैं.
  2. स्वर्ण हिरण और साधु वेश में रावण के प्रसंगों को चित्रों के जरिए दर्शाया गया है. इसी कारण यह स्थान पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

इस स्थान के नाम को लेकर कथा प्रचलित

भद्राचलम के नाम को लेकर भी एक कथा प्रचलित है. कहा जाता है कि भगवान राम ने अपने भक्त भद्र को दर्शन दिए थे. यहीं रहने का आश्वासन दिया था. तभी से यह स्थान भद्राचलम कहलाया.

यह लोग कथा भी प्रचलित

मंदिर निर्माण को लेकर एक लोककथा भी सुनाई जाती है. दम्मक्का नाम की एक वनवासी महिला को जंगल में एक गुफा के भीतर राम, सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां मिली थीं. इसके बाद उसने वहां एक साधारण छप्पर बनाकर पूजा शुरू की. धीरे-धीरे यह स्थान प्रसिद्ध होता गया और आज यह बड़ा धार्मिक केंद्र बन चुका है.

कैसे पहुंचे

भद्राचलम हैदराबाद से करीब 312 किलोमीटर और विजयवाड़ा से लगभग 182 किलोमीटर दूर है, जहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है.