पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां पर सूरी में सड़क निर्माण को लेकर हुए विवाद के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया। इस हमले में कई पुलिसवाले घायल हुए हैं। घटना के बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की और 14 लोगों को गिरफ़्तार किया है। यह घटना बुधवार देर रात उस समय हुई, जब सूरी के कंकुरिया गांव में सड़क का निर्माण कार्य चल रहा था।

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में उपद्रवियों द्वारा पुलिसकर्मियों पर पथराव किया गया। इस हिंसा में एक पुलिस अधिकारी सहित कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

पुलिस के अनुसार, ज़मीन विवाद के चलते इस इलाके में सड़क निर्माण को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा था। यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक कब्रिस्तान के पास निर्माण कार्य में लगी एक अर्थमूवर मशीन ने गलती से मिट्टी से ढकी एक कब्र को खोद दिया, जिससे तनाव पैदा हो गया। स्थानीय लोगों के एक समूह ने अर्थमूवर मशीन के चालक को घेर लिया, जिससे एक ही समुदाय के दो समूहों के बीच झड़प हुई.

कुखुदिही गांव में पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और भीड़ को शांत करने तथा चालक को छुड़ाने का प्रयास किया। हालांकि, भीड़ ने बंगाल पुलिस टीम पर पत्थर और ईंटें फेंकीं, जिससे प्रभारी अधिकारी (ओसी) शैलेंद्र उपाध्याय समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

सड़क निर्माण करने वाली कंपनी ने जब JCB का इस्तेमाल शुरू किया, तो गांव वालों और कंपनी के बीच कहा-सुनी हो गई। जल्द ही यह कहा-सुनी मारपीट में बदल गई।

मारपीट और बवाल की सूचना मिलने पर सूरी थाने के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज (IC) शैलेंद्र उपाध्याय के नेतृत्व में पुलिस बल मौके पर पहुंचा। आरोप है कि उसी दौरान, गांव वालों के एक गुट ने पुलिस पर ईंट-पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। पुलिस के वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की गई। गांव वालों के इस हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

IC शैलेंद्र उपाध्याय गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत वहां से निकालकर सूरी सदर अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद, बड़ी संख्या में पुलिस और केंद्रीय बल मौके पर पहुंचे। साथ ही, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बलों की दो कंपनियां भी वहां पहुंच गईं।

हालांकि, बुधवार की घटना में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बलों को तुरंत मौके पर भेजा गया। पुलिसकर्मियों पर हमला करने में शामिल 14 लोगों को गिरफ़्तार करने के लिए केंद्रीय बलों का इस्तेमाल किया गया। आपको बता दें बंगाल के विभिन्न हिस्सों में हिंसा की घटनाओं के बावजूद केंद्रीय बलों के जवानों का इस्तेमाल न करने को लेकर राज्य पुलिस की कड़ी आलोचना हुई थी।

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