रविंद्र भारद्वाज, रायबरेली. उत्तर प्रदेश में 1076 मुख्यमंत्री हेल्प लाइन की महिला कर्मचारियों के साथ कथित दमनात्मक व्यवहार ने सरकार की आउटसोर्सिंग नीतियों और श्रम संहिताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU) के प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही ने इस घटना को ‘सरकार के कर्मचारी विरोधी चरित्र और कंपनी राज का नमूना’ बताया है. हाल ही में लखनऊ की सड़कों पर अपने अधिकारों के लिए जूझती इन महिला कर्मचारियों की तस्वीरें सामने आईं, जो सरकार द्वारा आउटसोर्सिंग निगम बनाने की कवायद और मोदी सरकार की चार श्रम संहिताओं की असलियत को उजागर करती हैं.
विद्रोही ने याद दिलाया कि पिछले साल भी पुलिस महकमे की हेल्प लाइन 112 में कार्यरत युवतियों के साथ ऐसा ही व्यवहार हुआ था. विजय विद्रोही के अनुसार, आउटसोर्सिंग के जरिए नियोजन में लाखों रुपये की वसूली की जाती है और बेलगाम कंपनियां मनमानी, दुर्व्यवहार और कई महीनों तक वेतन न देने जैसी समस्याओं को जन्म देती हैं. भुगतान पर कमीशन और असीमित काम के बोझ ने उच्च शिक्षित युवक-युवतियों का जीवन नर्क बना दिया है, जिससे उनकी सामाजिक सुरक्षा और सेवा निरंतरता समाप्त हो गई है.
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प्रदेश में 8 लाख से ज्यादा कर्मचारी आउटसोर्सिंग के जरिए विभिन्न राजकीय सेवाओं में कार्यरत हैं, जिनमें चिकित्सा क्षेत्र के 60 प्रतिशत से ज्यादा नर्सेज, टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट शामिल हैं. लाखों कर्मचारियों के 6 माह से ज्यादा के वेतन बकाया है. सरकार ने 1 मार्च 2025 को विधानसभा में आउटसोर्सिंग निगम बनाने का प्रस्ताव पारित किया, जिसका उद्देश्य कंपनियों पर लगाम लगाना और समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना बताया गया.
हालांकि, विद्रोही का आरोप है कि इसका असली मकसद कर्मचारियों के नियमितीकरण, सामाजिक सुरक्षा और अबाध सेवा शर्तों के लिए होने वाले आंदोलनों को रोकना था, जिससे कंपनियों को ‘बेखौफ श्रम की लूट और मनमानी का रास्ता’ मिला. कामरेड विद्रोही ने मोदी सरकार की श्रम संहिताओं की भी आलोचना की, यह कहते हुए कि इन्होंने नौकरी के जरिए बेहतर जीवन के सपने को ध्वस्त कर दिया है और 12 घंटे काम का कानून महिला कामगारों के लिए ‘एक त्रासदी’ है. उन्होंने आउटसोर्सिंग, संविदा कर्मचारियों और शिक्षा संस्थानों के नौजवानों से साझा मोर्चा बनाकर ‘कॉर्पोरेट राज’ को पराजित करने का आह्वान किया. विद्रोही ने जोर दिया कि यदि सरकार 1076 हेल्प लाइन की महिला कर्मचारियों की बात नहीं सुन रही है, तो प्रदेश की जनता को उनके श्रम सम्मान की लूट और दमन के विरुद्ध उठ खड़े होना चाहिए.
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