पटना। बिहार में पारा चढ़ते ही जानलेवा चमकी बुखार (AES) ने एक बार फिर दस्तक दे दी है। गर्मी और उमस के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मुजफ्फरपुर सहित सभी संवेदनशील जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है। यह बीमारी मुख्य रूप से 1 से 10 वर्ष की आयु के कुपोषित बच्चों को निशाना बनाती है।

​मस्तिष्क पर सीधा प्रहार

​चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार एक्यूट एनसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (AES) सीधे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं में सूजन आ जाती है जिससे बच्चों के शरीर में तेज ऐंठन (चमकी) शुरू हो जाती है। समय पर इलाज न मिलना इसमें जानलेवा साबित होता है।

​अस्पतालों में वॉर मोड पर तैयारी

​खतरे को देखते हुए पटना के PMCH सहित सभी बड़े अस्पतालों में विशेष वार्ड और ICU बेड आरक्षित कर दिए गए हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) को स्पष्ट निर्देश हैं कि संदिग्ध मरीजों को तत्काल प्राथमिक उपचार देकर उच्च केंद्रों पर रेफर करें। आपातकालीन स्थिति के लिए 102 एम्बुलेंस सेवा को भी अलर्ट पर रखा गया है।

​दवाओं का स्टॉक और विशेष निगरानी

​स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को 44 प्रकार की जीवन रक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने का आदेश दिया है। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। साथ ही ग्रामीण इलाकों से मरीजों को लाने के लिए ग्राम परिवहन योजना के वाहनों को भी सक्रिय किया गया है ताकि परिवहन में देरी न हो।

​बचाव के लिए तीन अचूक मंत्र

  • ​पटना सिविल सर्जन ने अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है:
  • ​खाली पेट न सुलाएं: रात में बच्चों को मीठा या पौष्टिक भोजन देकर ही सुलाएं। ब्लड शुगर का गिरना इस बीमारी का मुख्य कारण है।
  • ​धूप से बचाव: दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बच्चों को बाहर न निकलने दें।
  • ​बुखार में सावधानी: यदि बुखार 100°F से ऊपर जाए तो शरीर को ठंडे पानी से पोंछें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • ​विशेषज्ञों का मानना है कि खाली पेट कच्ची लीची खाना और अत्यधिक गर्मी शरीर के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देते हैं जो चमकी बुखार को आमंत्रण देता है। सतर्कता ही इसका सबसे बड़ा बचाव है।