रांची पुलिस ने सेना और मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (MES) में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. लखनऊ मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिले गोपनीय इनपुट के आधार पर एसएसपी के निर्देश पर गठित एसआईटी ने चुटिया थाना क्षेत्र स्थित शारदा कॉलोनी से गिरोह के सक्रिय सदस्य अरविंद प्रसाद को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है. यह गिरोह एमईएस और सेना में बहाली का झांसा देकर अब तक 70 लाख रुपये डकार चुका है.
रांची में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले ‘फर्जी अधिकारियों’ का खेल खत्म हो गया है. लखनऊ मिलिट्री इंटेलिजेंस और रांची पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर चुटिया से अरविंद प्रसाद को गिरफ्तार किया है.
सेना भर्ती और अग्निवीर योजना के नाम पर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े का रांची पुलिस ने खुलासा किया है. लखनऊ मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिले इनपुट के आधार पर रांची पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के मास्टरमाइंड अरविंद प्रसाद को गिरफ्तार किया है. आरोपी पर भारतीय सेना और मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (MES) में नौकरी दिलाने का झांसा देकर करीब 70 से 80 लाख रुपये ठगने का आरोप है.
रांची पुलिस ने सेना भर्ती और अग्निवीर योजना के नाम पर चल रहे एक बड़े ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है. लखनऊ मिलिट्री इंटेलिजेंस के इनपुट पर कार्रवाई करते हुए मास्टरमाइंड अरविंद प्रसाद को गिरफ्तार किया है, जबकि गरोह के 6 अन्य सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी पुलिस तलाश कर रही है.
जानकारी के मुताबिक लखनऊ मिलिट्री इंटेलिजेंस ने सेना भर्ती के नाम पर चल रहे ठगी के नेटवर्क की सूचना रांची पुलिस को दी थी. इसके बाद रांची के एसएसपी के निर्देश पर सिटी एसपी एसपी पारस राणा के नेतृत्व में जांच के लिए एसआईटी टीम गठित की गई थी. रांची पुलिस ने मुन्ना कुमार की लिखित शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की.
एसआईटी ने चुटिया थाना क्षेत्र के शारदा कॉलोनी वाटर पॉइंट के पास किराए के मकान में छापेमारी कर मास्टरमाइंट अरविंद प्रसाद को गिरफ्तार किया. आरोपी मूल रूप से बिहार के सासाराम जिले का रहने वाला है. छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से सेना भर्ती से जुड़े कई फर्जी दस्तावेज और पहचान पत्र बरामद किए हैं. बरामद सामान में फर्जी आर्मी और MES आईडी कार्ड, कैंटीन स्मार्ट कार्ड, अलग-अलग नामों से बने प्रमाण पत्र, फर्जी मेडिकल स्टांप, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, सिम कार्ड और जॉइनिंग लेटर शामिल हैं.
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और झारखंड के एक दर्जन से अधिक बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगा. युवाओं से कहा गया कि उन्हें अग्निवीर, सेना भर्ती और MES विभाग में पोस्टिंग दिलाई जाएगी. इसी भरोसे पर उनसे लाखों रुपये वसूले गए.
पुलिस जांच में अब तक एक दर्जन से अधिक युवाओं से करीब 70 लाख रुपये की ठगी की बात सामने आई है. पुलिस ने अरविंद प्रसाद समेत कुल सात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है. गिरोह के अन्य छह फरार सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है.
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