Rajasthan News: राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल SMS में नियमों की धज्जियाँ उड़ाने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। दरअसल, रिश्वतकांड में फंसे निविक अस्पताल के डॉ. सोमदेव बंसल को गिरफ्तारी के बाद बीमार बताकर सीधे जनरल मेडिसिन वार्ड में भर्ती कर लिया गया। हैरानी की बात यह है कि इस भर्ती के लिए न तो किसी सीनियर डॉक्टर की सलाह ली गई और न ही तय मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन किया गया।

बिना साइन और सलाह के स्पेशल एंट्री

ग्राउंड सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डॉ. सोमदेव बंसल को गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद इमरजेंसी लाया गया था। कायदे से मेडिको-लीगल केस में एक लंबी प्रक्रिया होती है, लेकिन यहाँ डॉ. बंसल के लिए नियम बदल दिए गए। भर्ती पर्ची पर किसी रेजिडेंट या सीनियर डॉक्टर के साइन तक नहीं थे। सीधे यूनिट 9 में वीआईपी तरीके से बेड अलॉट कर दिया गया। मेडिसिन विभाग के एचओडी ने इस मनमानी पर अब कड़ी आपत्ति जताते हुए पत्र लिखा है।

रिपोर्ट्स ने खोली पोल, सब कुछ निकला नॉर्मल

सूत्रों ने बताया कि डॉ. बंसल पिछले 24 घंटे से ज्यादा समय से अस्पताल में ऐश कर रहे हैं, लेकिन उनकी जो भी जांच रिपोर्ट आई है, वह चौंकाने वाली है। आरोपी डॉक्टर का ब्लड टेस्ट, ईसीजी (ECG) और सिटी स्कैन (CT Scan) सब कुछ बिल्कुल नॉर्मल मिला है। यानी बीमारी के नाम पर सिर्फ जेल से बचने का पैंतरेबाज़ी चल रही है।

अधीक्षक की चुप्पी और पुराने कारनामे

गौरतलब है कि विवाद बढ़ता देख अब प्रशासन ने आनन-फानन में एक मेडिकल बोर्ड तो बना दिया है, जिसमें न्यूरोलॉजी और फोरेंसिक एक्सपर्ट्स शामिल हैं। लेकिन अस्पताल के अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है।

बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब रसूखदारों ने SMS अस्पताल को सुरक्षित पनाहगार बनाया हो। इससे पहले 1 लाख के रिश्वतकांड में फंसे डॉ. मनीष अग्रवाल ने भी जेल जाने से बचने के लिए ठीक यही हथकंडा अपनाया था। जब उनकी रिपोर्ट नॉर्मल आई, तब जाकर उन्हें वापस जेल भेजा जा सका।

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