पटना। बिहार की राजधानी में साइबर अपराधियों ने एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी की जमा-पूंजी पर हाथ साफ कर दिया। एसबीआई (SBI) की गृह ऋण शाखा से मुख्य प्रबंधक पद से रिटायर हुए एक व्यक्ति को फेसबुक पर शुरू हुई दोस्ती और निवेश के नाम पर करीब 97 लाख रुपये का चूना लगाया गया है।
फेसबुक विज्ञापन से हुई दोस्ती
पीड़ित अधिकारी 31 अगस्त 2024 को सेवानिवृत्त हुए थे। रिटायरमेंट के बाद वे फेसबुक पर सक्रिय रहने लगे, जहां उनकी नजर वेपलोग नामक एक विज्ञापन पर पड़ी। यहां उनकी बातचीत साक्षी अग्रवाल नाम की महिला से शुरू हुई, जिसने खुद को मुंबई की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी की CEO बताया। व्हाट्सएप पर बातचीत और दस्तावेजों के आदान-प्रदान के बाद आरोपी ने उन्हें निवेश का झांसा दिया।
मुनाफे का लालच और फर्जी ट्रेडिंग ऐप
साक्षी के कहने पर पीड़ित ने ‘Polyus Finance Pic’ प्लेटफॉर्म पर निवेश शुरू किया। शुरुआत में छोटे निवेश पर मुनाफा दिखाकर ठगों ने उनका भरोसा जीता। धीरे-धीरे पीड़ित ने बड़ी रकम निवेश की और 31 अक्टूबर 2025 तक उनके डिजिटल एसेट्स की वैल्यू लाखों में दिखाई गई। असली जालसाजी तब शुरू हुई जब पीड़ित ने अपनी राशि निकालने की कोशिश की।
टैक्स और पेनल्टी का डर
रकम निकासी के बदले फर्जी कंपनी ने मेल के जरिए 15% एक्सचेंज कमीशन और ऑडिट फीस के नाम पर लाखों रुपये मांगे। जब पीड़ित ने पैसे देने में असमर्थता जताई, तो आरोपी महिला ने खुद पैसे जमा करने का नाटक किया और अंततः 95 लाख रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट की मांग की गई। निवेश डूबने के डर से पीड़ित ठगों के बताए अनुसार पैसे ट्रांसफर करते गए।
इमोशनल ब्लैकमेलिंग और ठगी का अहसास
हद तो तब हो गई जब साक्षी ने अपनी मां की बीमारी का बहाना बनाकर ‘मदद’ के नाम पर भी पैसे ऐंठे। संपर्क पूरी तरह टूटने के बाद पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने पटना साइबर थाने में मामला दर्ज कराया।
सावधानी: साइबर पुलिस ने अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अज्ञात ऐप में निवेश न करें। कोई भी वैध कंपनी व्यक्तिगत खातों में पैसा ट्रांसफर नहीं करवाती है।
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