Dharm Desk – Akshaya Tritiya 2026 : अक्षय तृतीया बेहद शुभ और अबूझ मुहूर्त का दिन होता है. जिसमें बिना किसी विशेष मुहूर्त के नया व्यवसाय, दुकान, स्टार्टअप या किसी भी नए प्रोजेक्ट की शुरुआत की जा सकती है. मान्यता है कि इस दिन शुरू किया गया, कार्य स्थिरता और सफलता प्रदान करते है. तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे से प्रारंभ होकर 20 अप्रैल को सुबह 07:27 बजे तक रहेगी. जिसे पूरे दिन शुभ माना जा रहा है.

पौराणिक मान्यताएं
अक्षय तृतीया का संबंध कई पौराणिक घटनाओं से जोड़ा बताया जाता है. इसे भगवान परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है. जिन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है. इसी दिन विष्णु के नर-नारायण अवतार और त्रेता युग के आरंभ की मान्यता भी प्रचलित है. धार्मिक विश्वास है कि इस दिन व्रत, स्नान और दान करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है, जो कभी समाप्त नहीं होता, इसी कारण इसे ‘अक्षय” तृतीया कहा जाता है.
धन प्राप्ति के उपाय और टोटके
इस विशेष दिन लोग धन-समृद्धि के लिए कई उपाय करते हैं. परंपरा के अनुसार सोने या चांदी की वस्तुएं खरीदना अत्यंत ही शुभ माना जाता है. लक्ष्मी जी के चरण पादुका घर लाकर नियमित पूजा करने से घर में बरकत बनी रहती है. वही 11 कौड़ियों को लाल कपड़े में बांधकर पूजा स्थान में रखने से देवी लक्ष्मी का आकर्षण बढ़ता है. केसर-हल्दी से लक्ष्मी पूजन करने से आर्थिक बाधाएं दूर होने की मान्यता है.
पूजा-विधि और विशेष सावधानियां
अक्षय तृतीया के दिन शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व है. पूजा में सफेद कमल या लाल गुलाब अर्पित करना शुभ माना गया है. इस दिन सोना खरीदना अत्यंत फलदायी माना जाता है, जबकि स्टील, लोहा या कांच की वस्तुओं की खरीद से बचने की सलाह दी जाती है. यदि सोना संभव न हो तो चांदी या जौ खरीदना भी शुभ फलदायी माना गया है.
समृद्धि बढ़ाने के अन्य उपाय
आर्थिक उन्नति के लिए इस दिन घर या व्यवसाय, नौकरी स्थल पर श्रीयंत्र की स्थापना करना लाभकारी माना जाता है. शंख खरीदकर नियमित पूजा में बजाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. इसके अलावा एकाक्षी नारियल को पूजा स्थल पर स्थापित करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
दान-पुण्य का विशेष महत्व
अक्षय तृतीया पर दान का विशेष महत्व बताया जाता है. इस दिन जौ, गुड़, चना, शक्कर, फल और शीतल पेय का दान करना पुण्य दायी होता है. साथ ही पितरों की कृपा के लिए जल कलश, पंखा, छाता, सत्तू और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने की परंपरा हैं. शास्त्रों में गौ, भूमि, तिल, स्वर्ण, वस्त्र, धान्य और कन्या दान को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है.
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