कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। सुप्रीम कोर्ट में चंबल नदी में अवैध खनन और मुरैना वन रक्षक हत्या मामले पर अहम सुनवाई की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है कि चंबल में अवैध खनन नहीं रुका तो रेत खनन पर ही बैन लगा देंगे, जरूरत पड़ने पर CRPF उतारेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश, राजस्थान और UP शासन से इस मामले पर पूरी प्लानिंग रिपोर्ट मांगी है। यह भी कहा है कि यदि प्लानिंग रिपोर्ट सन्तोषजनक नहीं हुई तो कोर्ट एकतरफा सख्त आदेश जारी करेगा। अगली सुनवाई 11 मई को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया
दरअसल चंबल नेशनल सेंचुरी में बैंक का अवैध खनन और मुरैना वनरक्षक की हत्या के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों को सख्त अल्टीमेटम दिया है। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि तुरंत हालत नहीं सुधरे तो कोर्ट अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करेगा जिसके बाद मध्यप्रदेश और राजस्थान में रेत खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। जरूरत महसूस होने पर पूरे चंबल क्षेत्र में सीआरपीएफ तैनात कर दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट 11 मई तक इसकी स्थिति को देखेगा। जिसके बाद वह इससे जुड़े आदेश देगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा….
- राज्यों की कार्यशैली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कानून पूरी तरह सक्षम है पर नौकरशाही जानबूझकर सुस्ती दिखा रही है जो अवैध कारोबार में मूक सहमति का संकेत है
- जिन अफसरो को कानून लागू करना है वह अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से पीछे हट गए हैं खनन माफिया आधुनिक हथियारों और संसाधनों से लैस है वहीं वन और फील्ड स्टाफ लगभग निहत्था है
- चंबल और उसके पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचाने वालों से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलेंगे,आदेशों के पालन में लापरवाही बरतने वाले अफसर को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने कुछ सलाह भी दी है।
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि
- खनन माफिया से निपटने के लिए पुलिस और वन विभाग के संयुक्त गश्ती दल बनाए उन्हें आधुनिक हथियार और सुरक्षात्मक गियर, संचार उपकरण उपलब्ध कराये जाए
- मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश और राजस्थान आपसी समन्वय से एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार करें, जिससे इंटर स्टेट बॉर्डर पर कार्रवाई में कोई परेशानी ना आए
- तीनों राज्य को सुप्रीम कोर्ट में ऐसी रिपोर्ट देनी होगी जिसमें यह साफ हो कि अवैध खनन रोकने के लिए किस जिले में कंट्रोल रूम बनेगा कहां सीसीटीवी लगेंगे लाइव फीड कौन देखेगा इंटर स्टेट समन्वय कैसे होगा और फील्ड में कार्रवाई कौनसी एजेंसी किस तरह करेगी
- चंबल से जुड़े संवेदनशील हिस्से, खनन के रास्तों और नदी किनारे उन सभी इलाकों पर हाई रेजोल्यूशन वाई-फाई सक्षम सीसीटीवी लगाए जाए
- मुरैना और धौलपुर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर खनन में इस्तेमाल होने वाले हर ट्रैक्टर डंपर लोडर और ड्रेजर में जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस लगाना अनिवार्य होगा,इससे उनकी रियल टाइम लोकेशन ट्रैक होगी और अवैध रूट पकड़ना आसान होगा
अगली सुनवाई 11 मई को
बहरहाल 11 मई को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई होगी। इस दौरान तीनों राज्यों की ओर से जो रिपोर्ट पेश होगी जो बहुत महत्वपूर्ण होगी। जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट आगे रुख अख्तियार करेगी।
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