शिवालिक प्रिंट कंपनी के सैकड़ों मजदूरों ने पीस रेट बढ़ाने या सैलरी बेस पर रखने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। महंगाई के दौर में कम मजदूरी और सुविधाओं के अभाव से मजदूर परेशान हैं।
फरीदाबाद। औद्योगिक शहर फरीदाबाद (Faridabad) के सेक्टर-6 में आज एक भावुक कर देने वाला नजारा देखने को मिला। यहाँ ‘शिवालिक प्रिंट कंपनी’ (Shivalik Print Company) के बाहर सैकड़ों मजदूर चुपचाप जमीन पर बैठे नजर आए। न कोई शोर-शराबा, न कोई हंगामा, बस चेहरों पर अपने भविष्य को लेकर चिंता थी। इन मजदूरों का दर्द है कि वे दिन में 10 से 12 घंटे कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन महीने के अंत में उन्हें केवल 10 से 12 हजार रुपये ही मिल पाते हैं। बढ़ती महंगाई के इस दौर में इतनी कम राशि में परिवार का गुजर-बसर करना अब नामुमकिन हो गया है।
‘पीस रेट’ के चक्कर में पिसा मजदूर वर्ग
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना है कि वे ‘पीस रेट’ (Piece Rate System) पर काम करते हैं, जहां उन्हें प्रति पीस के हिसाब से महज कुछ पैसे मिलते हैं। मजदूरों का आरोप है कि सरकार ने फिक्स्ड सैलरी (Salary Based) पर काम करने वालों का वेतन तो बढ़ा दिया, लेकिन पीस रेट पर काम करने वालों को नजरअंदाज कर दिया गया। 15-20 सालों से काम कर रहे अनुभवी मजदूरों का कहना है कि उन्हें न तो कोई बोनस (Bonus) मिलता है और न ही सैलरी में उचित ग्रेड का लाभ। मजदूरों की मांग है कि या तो उन्हें परमानेंट सैलरी बेस पर रखा जाए या फिर उनके पीस रेट में कम से कम 35% की बढ़ोतरी की जाए।
प्रशासन और कंपनी से सम्मानजनक वेतन की आस
इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन (Peaceful Protest) में करीब 1500 से 2000 मजदूर शामिल हैं, जिनमें से ज्यादातर बिहार और अन्य राज्यों से आए प्रवासी श्रमिक हैं। मजदूरों का कहना है कि उनकी कोई बड़ी मांग नहीं है, वे बस इतना चाहते हैं कि उनकी मजदूरी इतनी हो जिससे वे अपने बच्चों का पेट भर सकें और कम से कम 4000 रुपये तक का कमरा किराया चुकाने के बाद कुछ बचा सकें। फिलहाल, मजदूरों ने अपनी मांगें प्रबंधन के सामने रख दी हैं और वे एक सम्मानजनक समझौते (Wage Agreement) की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि उनका जीवन थोड़ा आसान हो सके।

