अमेरिका और ईरान की बीच जारी युद्धविराम और समझौते के बनने-बिगड़ने की कड़ी में अब ईरानी नेता ट्रंप का मजाक उड़ा रहे हैं. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने तेल की बढ़ती कीमतों और वॉशिंगटन की ‘ब्लॉकेड थ्योरी’ को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मजाक उड़ाया है. गालिबाफ ने अपने X अकाउंट पर कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर US ब्लॉकेड की वजह से तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गई हैं. गालिबाफ ने कहा, “अब ये 140 के पार जाएगा. इश्यू (ब्लॉकेड के साथ) थ्योरी नहीं है, यह माइंडसेट है.” गालिबाफ ने ट्रंप के इस सुझाव का भी मजाक उड़ाया कि ज़्यादा तेल जमा होने से ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को परमानेंट नुकसान होने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा.
ट्रंप के दावों का उड़ाया मजाक
दरअसल, ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी के बीच 26 अप्रैल को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा था कि ‘तीन दिनों के भीतर ‘बहुत शक्तिशाली’ विस्फोट होगा और ईरान के तेल के कुएं फट जाएंगे.’ ट्रंप की तय समयसीमा गुजरने के बाद गालीबाफ ने उनकी इस धमकी का मजाक उड़ाया है. उन्होंने कहा, ‘तीन दिन हो गए, कोई कुआं नहीं फटा. हम इसे 30 दिन तक भी बढ़ा सकते हैं और यहां से कुओं का लाइव प्रसारण भी कर सकते हैं.’
उन्होंने आगे लिखा, ‘अमेरिकी प्रशासन को बेसेंट जैसे लोगों से इसी तरह की घटिया सलाह मिलती है, जो नाकेबंदी के सिद्धांत को आगे बढ़ाते हैं और तेल की कीमत को 120 डॉलर से ऊपर पहुंचा देते हैं. तेल की कीमतें अब 140 डॉलर तक जाएंगी. समस्या सिद्धांत नहीं, बल्कि सोच है.’
अमेरिकी के नाकेबंदी से ईरान के तेल निर्यात पर पड़ा है असर
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर के बावजूद, उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रखी है जिससे कोई भी कमर्शियल जहाज होर्मुज के जरिए न तो ईरान जा पा रहा है और न ही वहां से आ पा रहा है. इस नाकाबंदी ने ईरान के तेल निर्यात को भारी नुकसान पहुंचाया है. अमेरिका को उम्मीद है कि ईरान तेल न बेच पाने के कारण अपना उत्पादन घटा देगा. इससे उसका राजस्व भी गिर जाएगा या पाइपलाइनों और भंडारण में दबाव बढ़ने से बुनियादी ढांचे को नुकसान उठाने जैसे विकल्पों में से चुनना पड़ेगा.
ईरान के बहुत से तेल कुओं में पानी इंजेक्शन तकनीक का इस्तेमाल होता है और इन कुओं का संचालन लगातार जरूरी होता है. अगर उनसे तेल निकालना बंद कर दिया जाए तो उन्हें स्थायी नुकसान हो सकता है या उत्पादन में लंबे समय की गिरावट आ सकती है. निर्यात बंद होने से ईरान की तेल भंडारण क्षमता तेजी से खत्म हो रही है. इस बीच उसने 30 साल से खाली और निष्क्रिय पड़े फ्लोटिंग टैंकर ‘नाशा’ को फिर से सक्रिय किया है. यह स्टोरेज समुद्र में है और अब ईरान अपना तेल वहां स्टोर करने जा रहा है.
ट्रंप इस नाकेबंदी को तब तक जारी रखने के पक्ष में दिख रहे हैं जब तक ईरान के साथ स्थायी शांति समझौता नहीं हो जाता, ताकि बातचीत में चल रहे गतिरोध को खत्म किया जा सके. इस नाकाबंदी से ईरानी सरकार की आय और विदेशी मुद्रा का एक अहम स्रोत प्रभावित हुआ है, क्योंकि तेल शिपमेंट रोके या जब्त किए जा रहे हैं.
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