बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। 2024 के हिंसक छात्र आंदोलन से उभरी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान और उनकी पार्टी BNP को खुली चेतावनी दी है। पार्टी के प्रवक्ता आसिफ महमूद शोजीब भुइयां ने कहा कि यदि सत्ता पक्ष हिंसा का रास्ता चुनता है, तो “इस मामले में कोई भी हमसे आगे नहीं निकल सकता।”
2024 के आंदोलन से उभरी थी NCP
नेशनल सिटिजन पार्टी का उदय 2024 के उन बड़े छात्र आंदोलनों से हुआ था, जिन्होंने शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। आंदोलन के बाद देश में अंतरिम सरकार बनी, जिसका नेतृत्व मुहम्मद यूनुस ने किया। इस अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य बांग्लादेश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना था।
शेख हसीना सरकार पर लंबे समय से विपक्ष को दबाने और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगते रहे थे। इसी पृष्ठभूमि में हुए जनआंदोलन ने देश की राजनीति की दिशा बदल दी।
चुनाव में नहीं मिली सफलता
हालांकि आंदोलन के बाद बनी राजनीतिक जमीन का फायदा NCP को चुनावों में नहीं मिल सका। बांग्लादेश की जनता ने तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को समर्थन दिया और वे सत्ता में आए।
इसके बाद भी BNP और NCP समर्थकों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NCP अब भी अपनी चुनावी हार को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाई है, जबकि उसके आंदोलन ने ही निष्पक्ष चुनावों का रास्ता खोला था।
आसिफ महमूद का तीखा बयान
NCP प्रवक्ता आसिफ महमूद ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “अगर यह लड़ाई हम पर थोपी गई, तो यह किसी एक पार्टी या विचारधारा के खिलाफ नहीं होगी, बल्कि पूरी एक पीढ़ी के खिलाफ संघर्ष बन जाएगी। शेख हसीना ने इस पीढ़ी से टकराने की गलती की थी। उम्मीद है कि तारिक रहमान वही गलती नहीं दोहराएंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर सत्ताधारी दल हिंसा को राजनीतिक हथियार बनाता है, तो 2024 के आंदोलन में उनकी ताकत दुनिया देख चुकी है।
झिनाइदाह में झड़प के बाद बढ़ा विवाद
यह बयान झिनाइदाह में हुई एक हिंसक झड़प के बाद सामने आया। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, NCP के मुख्य समन्वयक नासिरुद्दीन पटवारी पर एक सभा के दौरान अंडा फेंका गया, जिसके बाद BNP और NCP समर्थकों के बीच टकराव शुरू हो गया। स्थिति बिगड़ने पर इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। आसिफ महमूद ने घटना में शामिल लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।
अंतरिम सरकार पर भी उठे सवाल
मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के 18 महीने के कार्यकाल के दौरान देश में कानून-व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठे। इस दौरान भीड़तंत्र बढ़ने और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय, पर हमलों की घटनाओं को लेकर सरकार की आलोचना हुई थी। अब BNP सरकार और NCP के बीच बढ़ती बयानबाजी बांग्लादेश की राजनीति को फिर से अस्थिरता की ओर ले जाती दिखाई दे रही है।
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