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विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी, दिल्ली की पूर्व सीएम, ने शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को लिखे पत्र में आम आदमी पार्टी (AAP) के 21 विधायकों के निलंबन को लोकतंत्र पर प्रहार और जनादेश का अपमान बताया. विधानसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में आतिशी ने विपक्ष की आवाज को जानबूझकर दबाया जा रहा था, विधायकों के निलंबन की निंदा करते हुए. उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा में हुई घटनाओं में विपक्षी दल के विधायकों को उनके विरोध प्रदर्शन के लिए भेदभावपूर्ण व्यवहार का सामना करना पड़ा.
आतिशी ने अपनी चिट्ठी में लिखा “विपक्ष को जय भीम के नारे लगाने पर सदन से बाहर किया गया. BJP के विधायक मोदी-मोदी के नारे लगाते रहे, उन्हें सदन में बैठने दिया गया. विपक्ष के विधायकों को विधानसभा परिसर से बाहर रोक देना, लोकतंत्र का अपमान है,”
उन्होंने कहा, ‘‘निर्वाचित विधायकों को दिल्ली विधानसभा परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई है, जिससे “विपक्ष को दबाना और उनकी आवाज को कुचलना” होगा. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के कार्यालय से बी.आर.आंबेडकर और भगत सिंह की तस्वीरें कथित तौर पर हटाए जाने के विरोध में नारेबाजी करने और उपराज्यपाल के अभिभाषण को बाधित करने के आरोप में आतिशी समेत 21 आप विधायकों को मंगलवार को विधानसभा में निलंबित कर दिया गया. विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों को निलंबित करते हुए उन्हें मार्शल के जरिए बाहर निकालने का आदेश दिया था.
आतिशी ने विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि वह ‘‘लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखेगा’’ और सभी विधायकों को ‘‘निष्पक्षता सुनिश्चित करेगा’’, कहते हुए, ‘‘माननीय अध्यक्ष महोदय, आप इस विधानसभा के संरक्षक हैं. संरक्षक का यह कर्तव्य है कि वह सभी विधायकों के साथ समान न्याय करे, चाहे वे सत्ता पक्ष के हों या विपक्ष के.’’ हाल ही में, आतिशी ने दिल्ली में घटना को ‘‘लोकतंत्र की हत्या’’ बताया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर इस विषय पर चर्चा करने के लिए समय देने का अनुरोध किया है. उन्होंने भाजपा पर राष्ट्रीय राजधानी में सत्ता में आने के बाद ‘‘तानाशाही की सभी हदें पार करने’’ का आरोप लगाया और लोकतांत्रिक मूल्यों को पुनःस्थापित करने के लिए हस्तक्षेप करने का आह्वान किया. दिल्ली आबकारी नीति पर नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट विधानसभा में पेश होते ही विधायकों को निलंबित कर दिया गया.
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली विधानसभा सत्र के पहले दिन से ही सदन में हंगामा जारी है. इसलिए, नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को एक पत्र लिखा है, जो आप विधायकों की एंट्री पर रोक लगाने के एक दिन बाद लिखा है. आप के 22 विधायकों में से 21 को पहले दिन पोस्टर विवाद और एलजी के अभिभाषण के दौरान नियमों का उल्लंघन मानते हुए स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने तीन दिन के लिए सत्र से बाहर कर दिया.
स्पीकर विजेंद्र गुप्ता के निर्णय के बाद 27 फरवरी को विधायकों को विधानसभा के गेट पर ही पुलिस ने रोका. विधायकों के विरोध पर सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने बताया कि स्पीकर का आदेश था. बाद में, आतिशी सहित आप विधायक गुरुवार को सदन की कार्यवाही समाप्त होने तक विधानसभा भवन के गेट पर धरने पर बैठ गए.
गुरुवार को आतिशी ने कहा कि दिल्ली विधानसभा के स्पीकर का यह निर्णय देश की आजादी के 75 साल के इतिहास में पहला है जब विधायकों को परिसर में जाने से रोका गया है, जो उनके साथ अन्याय है.
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