अशोक कुमार जायसवाल, वाराणसी। धर्म, अध्यात्म और सनातन परंपराओं की विश्वविख्यात नगरी काशी एक बार फिर भारतीय संस्कृति की वैश्विक स्वीकार्यता का सशक्त उदाहरण बनी। हाल ही में वाराणसी के पावन गंगा घाट पर एक विदेशी जोड़े ने पूर्ण हिंदू रीति-रिवाजों और वैदिक परंपराओं के अनुसार विवाह कर सभी का ध्यान आकर्षित किया। दोनों ने सात फेरे लेकर सात जन्मों तक एक-दूसरे का साथ निभाने की कसम खाई। इस दौरान उन्होंने कहा कि ऐसी मैरिज का हमने ड्रीम देखा था।

भारतीय पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए

गंगा मैया को साक्षी मानकर संपन्न हुए इस विवाह समारोह में वैदिक मंत्रोच्चार, अग्नि के सात पवित्र फेरे और पारंपरिक हिंदू विवाह संस्कार पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुए। दूल्हा और दुल्हन दोनों ही भारतीय पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। जिससे यह विवाह और भी भव्य, भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध दिखाई दिया। गंगा घाट पर इस अनोखे विवाह को देखने के लिए स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

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समारोह के दौरान मंत्रोच्चार और शंखनाद से पूरा घाट आध्यात्मिक ऊर्जा से गुंजायमान हो उठा। उपस्थित लोगों ने इस दृश्य को भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों की बढ़ती वैश्विक लोकप्रियता का प्रतीक बताया। यह विवाह न केवल काशी की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच पर उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारतीय परंपराएं, संस्कार और सनातन मूल्य आज भी विश्वभर के लोगों को गहराई से प्रभावित और आकर्षित कर रहे हैं।