दिल्ली सरकार यमुना नदी पर एक नया पुल बनाने पर विचार कर रही है, जिसे सिग्नेचर ब्रिज के पास विकसित किया जा सकता है। यह प्रस्ताव अभी प्रारंभिक चरण में है और इस पर संबंधित विभागों के बीच चर्चा चल रही है। इसके निर्माण से शहर के पूर्वी इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। दिल्ली सरकार सिग्नेचर ब्रिज के पास नया पुल बनाने या फिर पुराने लोहे के पुल (लोहा पुल) को बदलने के विकल्पों पर विचार कर रही है। सरकार का उद्देश्य ट्रैफिक जाम को कम करना और राजधानी के पूर्वी हिस्सों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ना है।

यह प्रस्ताव हाल ही में ट्रांस-यमुना बोर्ड द्वारा पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) के अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक में रखा गया था। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि यह योजना फिलहाल प्रारंभिक चरण में है और इस पर विचार-विमर्श जारी है। अधिकारी के अनुसार, सरकार इस प्रस्ताव के जरिए ट्रांस-यमुना इलाके में कनेक्टिविटी सुधारने और नॉर्थ-ईस्ट, नॉर्थ व सेंट्रल दिल्ली के बीच संपर्क को और मजबूत करने की संभावनाएं तलाश रही है।

अधिकारियों के अनुसार, RRTS स्टेशनों और दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने के बाद रिंग रोड पर, खासकर सराय काले खां इलाके में ट्रैफिक जाम बढ़ने की आशंका है। फिलहाल दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे और दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे रिंग रोड पर सराय काले खां के पास समाप्त होते हैं। दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे का डीएनडी–सोहना (जेवर) लिंक जल्द ही खुलने वाला है, जिससे इस क्षेत्र में ट्रैफिक का दबाव और बढ़ सकता है।

एक अधिकारी ने बताया कि इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार यमुना पर एक नया पुल बनाने का प्रस्ताव तैयार करने की योजना बना रही है। फिलहाल पुल की सटीक जगह तय नहीं हुई है और विभिन्न विकल्पों की जांच की जा रही है। इसके तहत पीडब्ल्यूडी पुराने वजीराबाद से कालिंदी कुंज तक के कॉरिडोर का अध्ययन करेगा, ताकि फिजिबिलिटी, ट्रैफिक जाम की स्थिति और वाहनों की आवाजाही का आकलन किया जा सके। अधिकारी ने यह भी बताया कि पुराना लोहे का पुल एक डबल-डेकर संरचना है, जिसमें निचले डेक पर सड़क यातायात और ऊपरी डेक पर रेल सेवाएं संचालित होती हैं। वर्तमान में यमुना नदी पर सड़क और रेल पुलों को मिलाकर करीब 25 पुल मौजूद हैं।

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