नितिन नामदेव, रायपुर। बलरामपुर जिले के कुसमी में एसडीएम द्वारा की गई मारपीट से आदिवासी किसान की मौत के मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस घटना पर तल्ख टिप्पणी करते हुए इसे प्रदेश में गिरती कानून-व्यवस्था के उदाहरण के तौर पर पेश किया है.

पंजाब दौरे से लौटने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया से चर्चा में कहा कि प्रदेश में क़ानून व्यवस्था की स्थिति बेहद ख़राब है. हद तो यह है कि प्रशासन के लोग ही हत्या करने लगे हैं. विष्णु देव सरकार और विजय शर्मा के विभाग के अधिकारी निरंकुश हो गए हैं. वृद्ध आदिवासी को पीट-पीट कर मार डाला.
वहीं होली के दौरान शराब दुकानों के खुले रहने पर तंज कसते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इनको (सरकार) तीज त्योहार से कोई मतलब नहीं है. होली जैसे त्योहार में शराब दुकान खोल रहे हैं. इनको केवल पैसे से मतलब है, सब कुछ पैसा है. एक बात तो समझ आती है कि सरकार को किसी के भावना से कोई मतलब नहीं है.
बिरनपुर हिंसा मामलें में 17 लोगों को कोर्ट से दोषमुक्त किए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि अपराध तो घटित हुआ है. सवाल इस बात का हैं कि उनके पुलिस और वकील किस तरह से कोर्ट में दलील रखते हैं. ये महत्वपूर्ण बात हैं. सभी लोग बाइज्जत बरी हो गए. इसका मतलब यह नहीं हैं कि हत्या नहीं हुई हैं. कोर्ट में किस तरह से पक्ष रखते हैं, वो महत्वपूर्ण है.
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