कल से शुरू हो रहा है होलाष्टक, जान लें क्या करें और क्या नहीं?
कल से शुरू हो रहा है होलाष्टक, जान लें क्या करें और क्या नहीं?
होली से आठ दिन पहले होलाष्ठक के दिन शुरू हो जाते हैं.
होली से आठ दिन पहले होलाष्ठक के दिन शुरू हो जाते हैं.
इसके बाद होलिका दहन के साथ होलाष्टक का समापन होता है.
इसके बाद होलिका दहन के साथ होलाष्टक का समापन होता है.
होलाष्टक आठ दिनों की वो अशुभ अवधि मानी जाती है जब असुर राज हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र और भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद को यातनाएं दी थीं.
होलाष्टक आठ दिनों की वो अशुभ अवधि मानी जाती है जब असुर राज हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र और भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद को यातनाएं दी थीं.
इस साल होलाष्टक के अशुभ दिन कल यानी 24 फरवरी से शुरू हो रहे हैं. इसका समापन होलिका दहन के दिन यानी 03 मार्च को होगा.
इस साल होलाष्टक के अशुभ दिन कल यानी 24 फरवरी से शुरू हो रहे हैं. इसका समापन होलिका दहन के दिन यानी 03 मार्च को होगा.
होलाष्टक में क्या करें?
होलाष्टक में क्या करें?
होलाष्टक के आठ दिनों में दान-दक्षिणा करें. पूजा-पाठ जप-तप करें. भगवान विष्णु और शिव जी की पूजा करें.
होलाष्टक के आठ दिनों में दान-दक्षिणा करें. पूजा-पाठ जप-तप करें. भगवान विष्णु और शिव जी की पूजा करें.
कुल देवी-देवता की पूजा करें रोजाना ऋण मोचन स्रोत, विष्णु सहस्त्रनाम, हनुमान चालीसा और श्रीसूक्त का पाठ करें.
कुल देवी-देवता की पूजा करें रोजाना ऋण मोचन स्रोत, विष्णु सहस्त्रनाम, हनुमान चालीसा और श्रीसूक्त का पाठ करें.
होलाष्टक के दिनों में पितरों का रोजाना तर्पण करें. उनका ध्यान करें. ग्रहों की शांति के लिए पूजा या यज्ञ करवाएं.
होलाष्टक के दिनों में पितरों का रोजाना तर्पण करें. उनका ध्यान करें. ग्रहों की शांति के लिए पूजा या यज्ञ करवाएं.
होलाष्टक में क्या न करें?
होलाष्टक में क्या न करें?
होलाष्टक के दिनों में शादी-विवाह न करें. भूमि, भवन और वाहन आदि की खरीदारी न करें.
होलाष्टक के दिनों में शादी-विवाह न करें. भूमि, भवन और वाहन आदि की खरीदारी न करें.
नवविवाहित महिलाएं इस समय में ससुराल में न रहें. सनातन धर्म में बताए 16 में से किसी भी संस्कार को होलाष्टक में न करें.
नवविवाहित महिलाएं इस समय में ससुराल में न रहें. सनातन धर्म में बताए 16 में से किसी भी संस्कार को होलाष्टक में न करें.