रोहित कश्यप, मुंगेली। लल्लूराम डॉट कॉम की खबर का एक बार फिर बड़ा असर हुआ है। समग्र शिक्षा अंतर्गत जिले के 41 हाई एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों के लिए स्वीकृत 82 लाख रुपये की राशि महीनों तक फाइलों में उलझी रही। सत्र 2025-26 के लिए प्रति विद्यालय 2-2 लाख रुपये की मंजूरी नवंबर में मिल चुकी थी, लेकिन बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने तक स्कूलों को राशि जारी नहीं की गई। नतीजतन व्यावसायिक शिक्षा से जुड़े 10वीं और 12वीं के छात्र पूरे सत्र जरूरी संसाधनों से वंचित रहे।

बता दें कि लल्लूराम डॉट कॉम में मामला प्रमुखता से प्रसारित होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। खबर सामने आते ही कलेक्टर कुंदन कुमार ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की मैराथन बैठक बुलाई। सूत्रों के मुताबिक बैठक में कलेक्टर ने देरी और लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई और स्पष्ट चेतावनी दी कि विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

क्यों अटकी रही 82 लाख की राशि?

राज्य परियोजना कार्यालय से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए थे कि राशि पीएफएमएस प्रणाली के माध्यम से विद्यालयों को वित्तीय सीमा के रूप में उपलब्ध कराई जाए। इस धनराशि का उपयोग ए4 पेपर, प्रयोगशाला मरम्मत, उपकरण सुधार, इंटरनेट बिल, प्रयोगात्मक सामग्री, करियर गाइडेंस, काउंसिलिंग और अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं पर किया जाना था।

समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि कई विद्यालयों ने वास्तविक आवश्यकताओं का समुचित आकलन किए बिना प्रस्ताव भेज दिए थे। कुछ प्रस्तावों में ऐसे मद शामिल थे जो समग्र शिक्षा की गाइडलाइन के अनुरूप नहीं थे। प्रस्तावों की इसी त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया के कारण फाइलें आगे नहीं बढ़ सकीं और पूरी व्यवस्था ठप पड़ गई।

कलेक्टर की सख्ती: अब बनेगी नई कार्ययोजना

कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि अब राशि का उपयोग पूरी तरह आवश्यकता आधारित और नियमों के अनुरूप ही किया जाएगा। एसडीएम की अध्यक्षता में बीईओ और बीआरसी सहित एक समिति गठित की गई है, जो प्रत्येक विद्यालय की अलग-अलग समीक्षा कर संशोधित और व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार करेगी।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियमों तथा समग्र शिक्षा के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। यदि किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी।

आज होगी प्राचार्यों की अहम बैठक

सूत्रों के अनुसार कलेक्टर द्वारा आज सभी संबंधित विद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक बुलाई गई है। इसमें समय-सीमा तय करते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। प्रशासन का लक्ष्य है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त होने से पहले पूरी राशि का नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि बजट ‘लेप्स’ न हो।

विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा मामला

82 लाख रुपये की यह राशि भले ही प्रशासनिक दस्तावेजों में एक आंकड़ा हो, लेकिन 41 विद्यालयों के सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए यह सीधे तौर पर प्रयोगात्मक शिक्षा, संसाधनों की उपलब्धता और परीक्षा परिणाम से जुड़ा प्रश्न है।

खबर सामने आने के बाद जिस तेजी से प्रशासन सक्रिय हुआ है, उससे संकेत मिलते हैं कि अब फाइलों की रफ्तार बढ़ेगी। हालांकि असली परीक्षा तब होगी, जब स्वीकृत धनराशि जमीन पर उतरे और विद्यार्थियों को उसका वास्तविक लाभ समय पर मिल सके। फिलहाल इतना तय है कि 82 लाख की फाइलों पर जमी धूल हट चुकी है और अब जवाबदेही तय होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

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