सुरेश पांडेय, सिंगरौली। देश को बिजली देने वाली सिंगरौली एक बार फिर गंभीर प्रदूषण के सवालों के बीच खड़ी है। एशिया के सबसे बड़े थर्मल पावर प्लांट NTPC Vindhyachal Super Thermal Power Station से निकलने वाली फ्लाई ऐश के परिवहन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। 

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आरोप है कि राख परिवहन का टेंडर मिलने के बाद Ashtech कंपनी द्वारा प्रदूषण विभाग के नियमों को ताक पर रखकर ऐश का परिवहन किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि जिस स्थान से राख लोड की जा रही है, उसके आसपास नगर निगम के वार्ड क्रमांक 36, 37 और 38 की घनी आबादी रहती है। उड़ती राख ने लोगों का घर से निकलना मुश्किल कर दिया है। सांस की तकलीफ और स्वास्थ्य संकट की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं और करीब 10 हजार लोगों पर इसका सीधा असर बताया जा रहा है।

इस मामले में जब एनटीपीसी विंध्याचल प्रशासन से सवाल किया गया तो उनका कहना है कि उन्होंने सिर्फ टेंडर दिया है और नियमों की जानकारी कंपनी को दे दी गई थी। अगर अनुमति नहीं ली गई तो इसकी जिम्मेदारी कंपनी की है।
वहीं दूसरी ओर Ashtech कंपनी का कहना है कि वे एनटीपीसी का काम कर रहे हैं और परमिशन लेना एनटीपीसी की जिम्मेदारी है।

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इस बीच प्रदूषण विभाग ने भी खुलासा किया है कि कंपनी को केवल विंध्यनगर प्लांट से गोरबी कोल माइंस तक सीमित शर्तों के साथ राख परिवहन की अनुमति दी गई थी। रेल या अन्य माध्यमों से राख परिवहन की कोई अनुमति नहीं ली गई है और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की बात कही जा रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या प्रदूषण विभाग आज सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर ऊर्जाधानी सिंगरौली में उड़ती राख का यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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