महाराष्ट्र में आज परिवहन सेवाएं बड़े पैमाने पर प्रभावित हो सकती हैं। राज्य के परिवहन संगठनों ने आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। करीब एक लाख ड्राइवर और वाहन मालिक मुंबई के आजाद मैदान में इकट्ठा होकर प्रदर्शन करने वाले हैं।यह हड़ताल मुख्य रूप से ई-चलान और ज्यादा टैक्स के खिलाफ की जा रही है। वाहन चालकों और मालिकों का कहना है कि मौजूदा नियम ड्राइवरों के लिए आर्थिक और कानूनी रूप से नुकसानदायक हैं।

हड़ताल में कौन-कौन शामिल हो रहा है?

यह हड़ताल महाराष्ट्र ट्रांसपोर्टर्स एक्शन कमेटी (M-TAC) द्वारा बुलाई गई है, जो ट्रक ऑपरेटरों, बस संघों, टैक्सी यूनियनों, टेम्पो चालकों और रिक्शा समूहों का प्रतिनिधित्व करती है। आंदोलन को ट्रकों और लोडिंग वाहन चालकों के अलावा स्कूल बस, निजी टूरिस्ट बस, टेंपो, टैक्सी, ऐप आधारित कैब (ओला और उबर), और ऑटो रिक्शा यूनियनों ने भी समर्थन दिया है। इससे राज्य की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ठप होने की आशंका है।

क्यों हड़ताल कर रहे हैं वाहन चालक?

इस पूरे विवाद का केंद्र ई-चालान प्रणाली है। यूनियनों का आरोप है कि नए नियमों में अगर कोई ड्राइवर ई-चालान को चुनौती देना चाहता है, तो उसे पहले कुल जुर्माने की 50 प्रतिशत राशि जमा करनी पड़ती है। परिवहन संगठनों का कहना है कि इससे ड्राइवरों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और यह दोषी मानने की पूर्वधारणा से प्रेरित है। आरोप है कि कुछ मामलों में डिजिटल जुर्माना वाहन की कीमत से भी ज्यादा है।

वाहन मालिकों के ये हैं तर्क

यूनियन नेताओं के अनुसार, ई-चालान अक्सर बिना स्पष्ट वजह के बिना जारी किए जाते हैं। यूनियन का कहना है कि यह प्रणाली वाहन चालकों के बजाय वाहन मालिकों को ज्यादा दंडित करती है, जबकि असल में नियम तोड़ने के लिए चालक जिम्मेदार होते हैं। वाहन मालिकों का तर्क है कि केंद्र और राज्य के टैक्स के अलावा उन्हें बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT), सड़कों के लिए अतिरिक्त टोल का भुगतान करना पड़ता है, जिससे उन्हें वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है।

क्या हैं वाहन चालकों की मांगें?

  • गलत और पुराने ई-चालानों का रद्दीकरण।
  • कोर्ट सुनवाई के लिए 50 प्रतिशत राशि वाले नियम पर रोक।
  • पार्किंग और लोडिंग जोन बनने तक ‘नो पार्किंग’ जुर्माना स्थगित।
  • वाहन क्लीनर नोटिफिकेशन और बॉर्डर चेक पोस्ट पर स्पष्ट निर्णय।
  • परिवहन विवादों के लिए न्यायिक तंत्र की स्थापना।

पैनिक बटन और FDSS जैसे महंगे उपकरण लगाने की अनिवार्यता पर रोक। यूनियनों का कहना है कि करीब 4,500 करोड़ रुपये के ई-चलान लंबित हैं, जिनमें से कई तकनीकी त्रुटियों के चलते जारी हुए हैं।

संगठनों और परिवहन मंत्री के बीच बैठक रही बेनतीजा

हड़ताल से पहले परिवहन संगठनों और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के बीच बैठक हुई थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। संगठनों का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से लिखित में कोई आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। परिवहन मंत्री सरनाईक ने कहा है कि सरकार परिवहन क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक रुख अपना रही है। इस मुद्दे पर आज एक और बैठक बुलाई गई है।

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