Rajasthan News: उम्र सिर्फ एक संख्या है, यह बात बीकानेर की 94 वर्षीय पाना देवी गोदारा ने पूरी दुनिया को दिखा दी है। चेन्नई में हुई 23वीं एशियन मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में इस जांबाज दादी ने चार गोल्ड मेडल जीतकर न केवल राजस्थान का, बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया है।

बता दें कि नोखा तहसील के अणखीसर गांव की रहने वाली पाना देवी ने साबित कर दिया है कि अगर मन में कुछ करने का जज्बा हो, तो शरीर की उम्र कोई बाधा नहीं बनती। उन्होंने 100 मीटर दौड़ के साथ-साथ शॉट पुट, जैवलिन थ्रो और डिस्कस थ्रो जैसे खेलों में अपने प्रतिद्वंदियों को पछाड़ते हुए चार स्वर्ण पदक अपने नाम किए।

उनकी इस फिटनेस के पीछे कोई जिम या महंगी डाइट नहीं, बल्कि सादा जीवन और अनुशासन है। पाना देवी बताती हैं कि उनकी सेहत का राज भोर में 5 बजे उठना, नियमित योग और व्यायाम करना है। बता दें कि वे आज भी अपना काम खुद करती हैं और खान-पान में बाजरे की रोटी, शुद्ध दूध और घी को प्राथमिकता देती हैं। वे युवाओं को नशे की लत से दूर रहने की नसीहत देती हैं।

इस सफर की शुरुआत काफी रोचक रही। पाना देवी के पोते जय किशन गोदारा, जो खुद एक कोच हैं, ने अपनी दादी को प्रेरित किया। उन्होंने दिव्यांग खिलाड़ियों को देखकर सोचा कि यदि वे खेल सकते हैं, तो उनकी फिट दादी क्यों नहीं? बस फिर क्या था, पोते की कोचिंग और दादी की मेहनत रंग लाई। अब तक पाना देवी अलग-अलग प्रतियोगिताओं में 16 स्वर्ण पदक जीतकर ‘गोल्डन दादी’ के रूप में मशहूर हो चुकी हैं।

हालांकि, इस कामयाबी के साथ एक छोटी सी कड़वी सच्चाई भी जुड़ी है। आर्थिक तंगी के कारण पाना देवी पिछले साल स्वीडन में होने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकी थीं। अब उनके परिवार ने केंद्र और राजस्थान सरकार से आर्थिक सहयोग की अपील की है ताकि वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा लहरा सकें।

पाना देवी की दिली इच्छा है कि वे एक बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करें। मैदानी स्तर पर भले ही संसाधनों की कमी रही हो, लेकिन उनका हौसला इतना बुलंद है कि वे अब विदेशों में भी भारत का नाम रोशन करने के सपने देख रही हैं। उम्मीद है कि सरकार उनकी इस खेल भावना को सम्मान देगी और उन्हें अपना सपना पूरा करने का मौका मिलेगा।

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