लखनऊ. बुधवार को राजधानी से धर्मयुद्ध का शंखनाद हो गया. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कांशीराम स्मृति उपवन आशियाना से शंखनाद किया. शंकराचार्य ने इसे ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ का मुख्य आयोजन बताया, जिसमें गो माता को राष्ट्रमाता या राज्य माता का दर्जा देने की मांग पर जोर दिया गया.
शंकराचार्य ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया. उन्होंने कहा कि अखाड़े शंकराचार्य की सेना होते हैं, लेकिन अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि वह शंकराचार्य के साथ नहीं हैं मुख्यमंत्री के साथ हैं. इसलिए अब हम अपनी एक चतुरंगिनी सेना भी बनाएंगे. जिसमें साधु वैरागी और अन्य सभी संत होंगे.
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि भाजपा के अलावा जब तक दूसरी पार्टियां कोई बड़ी घोषणा नहीं करती हैं हम उनसे भी लड़ेंगे. समाजवादी से भी लड़ेंगे और कांग्रेस से भी लड़ेंगे. नंबर एक पर जो है वह सामने आएगा. जो गाय माता के लिए बिना किसी संकोच के स्पष्ट घोषणा करेगा वह हमारा होगा.
ब्राह्मण सुख के लिए नहीं तपस्या के लिए है- शंकराचार्य
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ब्राह्मणों के लिए कहा कि ब्राह्मण सुख के लिए नहीं तपस्या के लिए है. ब्राह्मण के लिए सुख नहीं शुभ मांगा गया है. इसी देश में राजा परीक्षित हुए, दिग्विजय के लिए निकले थे. यह रोग है कि ‘मैं नहीं मानता उनको शंकराचार्य’. इसके लिए दिग्विजय करनी पड़ती है. शंकराचार्य सनातन की सुप्रीम कोर्ट है. मंडलेश्वर हाईकोर्ट हैं, साधु संत भी हमारे लोअर कोर्ट हैं. यहां भीड़ निर्णय नहीं करती है. यहां भीड़ का कोई अर्थ नहीं है, यह भेड़ तंत्र नहीं है. जिसको खुजली हो आ जाए सबको जवाब मिलेगा. कलियुग का यह स्वभाव है वह ब्राह्मण और गाय पर प्रहार करता है.
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