US Trade Investigation: ईरान-इजराइल युद्ध के कारण विश्व में मचे उथल-पुथल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को बड़ा झटका दे सकते हैं। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने विदेशों में होने वाले औद्योगिक उत्पादन को लेकर नई व्यापारिक जांच शुरू कर दी है। यह जांच बुधवार को शुरू हुई। इस नई जांच में भारत सहित 16 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया है।
खबरों के मुताबिक यह कदम तब उठाया गया जब अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने आर्थिक आपातकाल का हवाला देकर लगाए गए ट्रंप के पुराने आयात शुल्क को रद्द कर दिया। यह जांच 1974 के व्यापार कानून की धारा 301 के तहत की जा रही है।
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रियर ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि सरकार 1974 के व्यापार कानून की धारा 301 के तहत जांच शुरू करेगी। इस जांच के बाद अमेरिका इन देशों से आने वाले सामान पर नया आयात कर लगा सकता है। समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग के अनुसार पत्रकारों से बातचीत में जेमीसन ग्रियर ने कहा कि अमेरिका का मानना है कि कई बड़े व्यापारिक साझेदार देशों ने उत्पादन क्षमता इतनी बढ़ा ली है कि वह घरेलू और वैश्विक मांग से जुड़ी नहीं है। आधिकारिक बयान में ग्रियर ने कहा कि अमेरिका अब अपने औद्योगिक आधार को दूसरे देशों के कारण कमजोर नहीं होने देगा। उनका कहना है कि कई देश अपनी जरूरत से ज्यादा उत्पादन की समस्या को अमेरिका पर डाल रहे हैं और बड़ी मात्रा में सामान यहां भेज रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन जांचों से यह साफ है कि ट्रंप प्रशासन जरूरी आपूर्ति व्यवस्था को फिर से अमेरिका के भीतर स्थापित करना चाहता है और अमेरिकी श्रमिकों के लिए अच्छी आय वाली नौकरियां पैदा करना चाहता है।
किन देशों को किया गया शामिल
इस जांच में अमेरिका के कई बड़े व्यापारिक साझेदार देशों को शामिल किया गया है. इनमें चीन, यूरोपीय संघ, मेक्सिको, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान शामिल हैं. इसके अलावा स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, वियतनाम और बांग्लादेश भी जांच के दायरे में हैं।
अमेरिकी उद्योगों पर असर की बात
ग्रियर ने आगे कहा कि ट्रंप प्रशासन के औद्योगिक विकास के प्रयासों के सामने बड़ी चुनौती है। कई विदेशी अर्थव्यवस्थाओं में उत्पादन जरूरत से ज्यादा हो रहा है। कई क्षेत्रों में अमेरिका के व्यापारिक साझेदार देश उतना सामान बना रहे हैं जितना वे अपने देश में उपयोग नहीं कर सकते। इस कारण अतिरिक्त सामान दूसरे देशों में भेजा जा रहा है। इससे अमेरिका के घरेलू उद्योग प्रभावित हो रहे हैं और कई मामलों में अमेरिका में नए कारखाने लगाने या विस्तार करने की योजनाएं भी रुक रही हैं। कुछ क्षेत्रों में अमेरिका की उत्पादन क्षमता काफी कम हो गई है और कई मामलों में वह विदेशी प्रतिस्पर्धियों से पीछे रह गया है।
हाल में हुई है डील
बता दें कि हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते की घोषणा हुई है। इस समझौते के बाद ट्रंप प्रशासन ने भारत पर लगाए गए आयात कर को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। अमेरिका के अनुसार यह फैसला तब लिया गया जब भारत ने रूस से तेल खरीद कम करने और रोकने का आश्वासन दिया है। भारत और अमेरिका के इस व्यापार समझौते की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
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