Anti Islamophobia Day: इस्लामोफोबिया विरोधी दिवस पर संयुक्त राष्ट्र यानी यूनाइटेड नेशन (UN) में ‘इस्लामोफोबिया’ पर चर्चा हुई। चर्चा के दौरान महासभा में भारत (India) ने एक बार फिर पाकिस्तान (Pakistan) को जमकर लताड़ा है। पाकिस्तान का नाम लिए बगैर भारत ने ‘इस्लामफोबिया’ को लेकर उस पर निशाना साधा। भारत ने अप्रत्यक्ष तौर पर पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि हमारा पड़ोसी देश इसका ज्वलंत उदाहरण है कि किस तरह से वह अपने पड़ोस में ‘इस्लामफोबिया’ के नाम पर मनगढ़ंत कहानियां रचता रहा है। इस देश में अहमदिया समुदाय के खिलाफ क्रूर दमन को क्या कहा जाएगा? यही नहीं बेसहारा अफगानों पर वह लगातार अत्याचार कर रहा है। रमजान के पवित्र महीने में उस पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए जा रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश (Parvathaneni Harish) ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि हमारा प्रतिनिधिमंडल धर्म के नाम पर होने वाली किसी भी तरह की हिंसा और नफरत की कड़ी निंदा करता है। चाहे वह किसी भी धर्म के नाम पर क्यों न हो।
पर्वतनेनी हरीश ने आगे कहा कि हम एक ऐसे देश के तौर पर जहां दुनिया के लगभग हर बड़े धर्म के मानने वाले शांतिपूर्वक साथ रहते हैं। ऐसे देश के तौर पर जिसने दुनिया के 4 बड़े धर्मों (हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म) को जन्म दिया, हम किसी भी अन्य देश की तुलना में, धार्मिक भेदभाव से मुक्त दुनिया के अन्य देशों के प्रति कहीं अधिक जागरूक है। ”हमारा’सर्व धर्म समभाव’ का दर्शन, जिसका मतलब है सभी धर्मों के प्रति समान आदर। यह हमारे देश की सभ्यतागत जीवन-शैली का हिस्सा है। इसी भावना ने संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना को प्रेरित भी किया है।
धर्म का राजनीतिकरण न हो
उन्होंने आगे कहा कि इतिहास हमेशा इस बात का गवाह रहा है कि धर्म का राजनीतिकरण करने से न शिकायतें सुलझती हैं और न ही उनका समाधान होता है। भले ही इरादे कितने भी अच्छे क्यों न हों, ऐसा करने से चुनिंदा और पोलराइजेशन करने वाले नैरेटिव्स को वैधता मिलने का खतरा बना रहता है, आगे चलकर यही चीजें अधिक विभाजन पैदा करती हैं। संयुक्त राष्ट्र के गठन के पीछे यह भावना था कि यह एक ऐसी संस्था बने जो धर्म, संस्कृति और राजनीति से परे हो। संघ की विश्वसनीयता इसकी सार्वभौमिकता और निष्पक्षता पर टिकी हुई है। लिहाजा हम ऐसे ढांचों के प्रति सावधानी बरतने का अनुरोध करते हैं जो केवल किसी एक धर्म पर ही केंद्रित हों, और जो ‘रिलीजियोफोबिया’ (धर्म-भय) की व्यापक परिघटना के सभी रूपों को संबोधित न करते हों।

‘अपनी मूल भावना से बना रहे UN’
भारत का पक्ष रखते हुए हरीश ने कहा कि यही कारण है कि साल 1981 का ‘धर्म या विश्वास के आधार पर असहिष्णुता और भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर घोषणापत्र’ (Declaration on the Elimination of All Forms of Intolerance and of Discrimination Based on Religion or Belief remains) — आज भी हमारी नजर में- एक अत्यंत संतुलित और स्थायी दस्तावेज बना हुआ है; यह सभी धर्मों के अनुयायियों के अधिकारों को सुनिश्चित करता है, बिना किसी एक धर्म को खास प्राथमिकता दिए।
भारत ने PAK पर साधा निशाना
किसी देश का नाम लिए बगैर भारत ने अप्रत्यक्ष तौर पर पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि हमारा पश्चिमी पड़ोसी देश इस बात का एक ज्वलंत उदाहरण है कि किस तरह से वह अपने ही पड़ोस में ‘इस्लामफोबिया’ के नाम पर मनगढ़ंत कहानियां रचता रहा हैय़ यह सोचना होगा कि इस देश में अहमदिया समुदाय के खिलाफ क्रूर दमन को क्या कहा जाएगा? या फिर बेसहारा अफगानों को बड़े पैमाने पर वापस भेजना, या फिर रमजान के इस पावन महीने में ताबड़तोड़ हवाई बमबारी करना?भारत में मुसलमानों के हालात पर हरीश ने कहा कि हमारा देश 20 करोड़ से अधिक मुसलमानों का घर है, जो दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी में से एक है। इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC), जिसे हमारे पश्चिमी पड़ोसी ने हमारे खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की लगातार कोशिश की है, उसने हमारे देश पर बार-बार झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाए। हमारे देश के मुसलमान, जिनमें जम्मू-कश्मीर के मुसलमान भी शामिल हैं, अपनी बात रखने के लिए अपने प्रतिनिधि खुद चुनते हैं। यहां जो एकमात्र “फोबिया” (डर) साफ तौर पर दिखाई देता है, वह भारत के उस बहुसांस्कृतिक और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के खिलाफ है। इस तरह की बातें भारत की बुनियादी सोच के खिलाफ हैं।
इस्लामोफोबिया और भेदभाव पर हो कार्रवाईः महासचिव एंटोनियो गुटेरेस
इस्लामोफोबिया को लेकर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने रविवार को दुनिया भर में मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव और पूर्वाग्रह से लड़ने के लिए और ज्यादा मजबूत कदम उठाने की अपील की। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि मुसलमानों के खिलाफ नफरत सामाजिक एकता और मानवाधिकारों के लिए लगातार खतरा बनी हुई है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में करीब दो अरब मुसलमान अलग-अलग संस्कृतियों और समाजों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो मानवीय विविधता की समृद्धि को दर्शाते हैं। UN प्रमुख ने इस्लामोफोबिया और भेदभाव पर कड़ी कार्रवाई की भी मांग की।
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