कुंदन कुमार/पटना। बिहार कांग्रेस के भीतर लंबे समय से सुलग रही असंतोष की आग अब सार्वजनिक रूप से धधकने लगी है। मंगलवार को पटना के एक निजी होटल में पार्टी के ‘विक्षुब्ध’ नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक बड़ा जमावड़ा हुआ। इस बैठक की अध्यक्षता आनंद माधव ने की। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पार्टी की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करना और नेतृत्व के खिलाफ आवाज बुलंद करना था।

प्रभारी पर सीधा हमला

बैठक में मौजूद कार्यकर्ताओं ने बेहद कड़े लहजे में बिहार कांग्रेस के प्रभारी पर निशाना साधा। कार्यकर्ताओं ने एक सुर में आरोप लगाया कि बिहार में कांग्रेस को मजबूत करने के बजाय प्रभारी ही इसे कमजोर करने का काम कर रहे हैं। नेताओं का कहना था कि प्रभारी की गलत नीतियों और उपेक्षा के कारण आज पूरे देश में बिहार कांग्रेस की जो किरकिरी हुई है, वह किसी से छिपी नहीं है। इसके बावजूद आलाकमान और पार्टी के बड़े नेता इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।

दबाव की राजनीति और भविष्य का मिशन

आनंद माधव की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में यह भी आरोप लगाया गया कि कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस बैठक में आने से रोकने की कोशिश की गई। उन पर दबाव बनाया गया, लेकिन इसके बावजूद भारी संख्या में कार्यकर्ता जुटे। विक्षुब्ध गुट ने स्पष्ट किया कि उनका मिशन बिहार कांग्रेस’ रुकने वाला नहीं है।

कार्यकर्ताओं का संकल्प

नेताओं ने हुंकार भरते हुए कहा कि वे पार्टी को कुछ चुनिंदा लोगों के हाथों की कठपुतली नहीं बनने देंगे। उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपने स्तर पर गांव-गांव जाकर कांग्रेस को मजबूत करेंगे और उन चेहरों को बेनकाब करेंगे जो निजी स्वार्थ के लिए संगठन को गर्त में ले जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने साफ संदेश दिया कि वे ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए तैयार हैं।