Land for Job Case: चर्चित लैंड फॉर जॉब मामले में लालू परिवार को बड़ा झटका लगा है। दरअसल दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने राजद सुप्रीमो लालू यादव और राबड़ी देवी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें कोर्ट से ऐसे 1600 से अधिक दस्तावजों की मांग की गई थी, जिन्हें जांच एजेंसी ने अपने केस में शामिल ही नहीं किया है।

सुलझने की जगह और उलझेगा मामला- कोर्ट

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि, इस तरह की मांग से केस सुलझने के बजाय और उलझेगा। जज विशाल गोगने ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कोशिश ट्रायल को लंबा खींचने जैसी लगती है। उन्होंने कहा कि, ऐसे कागजों को देने का कोई मतलब ही नहीं बनता, जिसे जांच एजेंसी ने केस में इस्तेमाल ही नहीं किया है। कोर्ट ने यह भी बताया कि, आरोपियों को पहले ही इन दस्तावेजों को देखने का मौका मिल चुका है।

मामले की सुनवाई तेज होने की उम्मीद

बता दें कि लालू यादव और राबड़ी देवी के अलावा इस मामले में आरोपी आर.के. महाजन और रेलवे के पूर्व अधिकारी महीप कपूर ने भी इस संबंध में याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कार्ट के इस रुख से साफ है कि अदालत अब इस मामले को और नहीं खिंचना चाहता है। मामले की सुनवाई तेज होने की उम्मीद है।

46 आरोपियों पर तय हो चुका है आरोप

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 9 जनवरी 2026 को लैंड फॉर जॉब मामले में राजद सुप्रीमो लालू यादव, पूर्व सीएम राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और हेमा यादव समेत कुल 46 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं। जबकि 52 आरोपियों को विशेष जज विशाल गोगने की अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।

क्या है लैंड फॉर जॉब केस?

लालू यादव पर आरोप है कि (2004-09) रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बिना वैकैंसी निकाले बड़ी संख्या में लोगों को जमीन के बदले रेलवे में नौकरी दी थी। नौकरी के बदले ली गई जमीन को लालू यादव ने अपने बेटे, बेटियों, पत्नी और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर ली थी। सीबीआई ने 18 अक्टूबर, 2022 को इस मामले में पहली बार चार्जशीट दाखिल की, जिसमें लालू यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव (दोनों लालू की बेटियां) सहित कुल 16 लोगों के नाम दर्ज किया गया था।

ये भी पढ़ें- जदयू अध्यक्ष पद के लिए आज नामांकन करेंगे CM नीतीश, निर्विरोध जीत तय, अब तक किसी और ने नहीं भरा है पर्चा