दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटी में लंबे समय से खाली पड़े पदों को लेकर केंद्र सरकार पर नाराज़गी जताई है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि सरकार अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई है कि आयोग में चेयरपर्सन और सदस्यों के पद कब तक भरे जाएंगे। अदालत ने इस पर गंभीर चिंता जताई। चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय करिया (D. K. Upadhyaya) और जस्टिस तेजस (Tejas Karia) की बेंच ने कहा कि पहले भी केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल कर नियुक्ति प्रक्रिया की ठोस समयसीमा बताने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे में इस संबंध में कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं दी गई, जिस पर कोर्ट ने असंतोष जताया।

हालांकि, सरकार के हलफनामे में केवल यह उल्लेख किया गया है कि मंत्रालय ने नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी है और विभिन्न स्रोतों से प्राप्त बायोडाटा व नामांकनों की जांच की जा रही है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि हलफनामे में ऐसा कुछ नहीं है जिससे यह पता चले कि नियुक्तियां कब तक पूरी होंगी। अदालत ने साफ कहा कि इस तरह की महत्वपूर्ण जानकारी के बिना हलफनामा अधूरा है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि आयोग जैसे अहम निकाय में लंबे समय तक पद खाली रहना उचित नहीं है और इस मामले में स्पष्टता और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंत्रालय के अधिकारी से मांगा जवाब

सुनवाई के दौरान अदालत ने मिनिस्ट्री ऑफ माइनॉरिटी अफेयर्स के डिप्टी सेक्रेटरी को निर्देश दिया कि वह दो हफ्तों के भीतर यह स्पष्ट करें कि सरकार के हलफनामे में नियुक्तियों की कोई समयसीमा क्यों नहीं दी गई। मंत्रालय की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया था कि चेयरपर्सन और सदस्यों की नियुक्ति के लिए प्रस्तावों की जांच की जा रही है और मामला फिलहाल सक्षम प्राधिकरण के पास विचाराधीन है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार के वकील को याद दिलाया कि आयोग एक वैधानिक संस्था है, लेकिन इसके चेयरपर्सन और सभी सदस्य पिछले साल अप्रैल से ही खाली पड़े हैं, जिसके कारण आयोग का कामकाज प्रभावित हो रहा है। अदालत ने यह भी बताया कि 30 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में भी इन खाली पदों पर चिंता जताई गई थी और केंद्र से पूछा गया था कि उन्हें भरने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। मंत्रालय की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया कि नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और विभिन्न स्रोतों से प्राप्त प्रस्तावों व नामांकनों की जांच की जा रही है, जबकि मामला सक्षम प्राधिकरण के पास विचाराधीन है।

कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि 6 फरवरी की सुनवाई में केंद्र सरकार को “बेहतर हलफनामा” दाखिल करने के लिए कहा गया था, जिसमें नियुक्ति प्रक्रिया और उसे पूरा करने की ठोस समयसीमा का विवरण हो। हालांकि, सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में केवल यह कहा गया कि नियुक्ति के लिए प्रस्तावों और नामांकनों की जांच की जा रही है और मामला सक्षम प्राधिकरण के पास विचाराधीन है। अदालत ने टिप्पणी की कि हलफनामे में नियुक्तियों की कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं दी गई है, जिससे यह अधूरा प्रतीत होता है।

 यह मामला Mujahid Nafees की याचिका पर चल रहा है, जिसमें कहा गया है कि आयोग में लंबे समय से पद खाली रहने के कारण अल्पसंख्यकों से जुड़े कई मुद्दों पर काम प्रभावित हो रहा है।अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई को तय की है। तब तक केंद्र सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया और समयसीमा को लेकर स्पष्ट जानकारी देनी होगी।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m