वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि को न्याय, कर्म, अनुशासन आदि का कारक माना जाता है। नौ ग्रह में शनि सबसे धीमी गति से चलते हैं। वह एक राशि में करीब ढाई साल रहते हैं। इसी के कारण शनि का प्रभाव 12 राशियों के साथ-साथ देश-दुनिया में लंबे समय तक रहता है। 21 मार्च को शनि देव मीन राशि में रहते हुए उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश कर रहे हैं। इस समय वे अस्त अवस्था में हैं। जिससे उनका प्रभाव मिला-जुला और कुछ रहस्यमयी रह सकता है।

वर्तमान में कुंभ, मीन और मेष राशि पर साढ़ेसाती, जबकि सिंह और धनु राशि पर ढैय्या का प्रभाव चल रहा है। ऐसे में शनि के इस नक्षत्र परिवर्तन का असर इन राशियों पर विशेष रूप से देखने को मिल सकता है। शनि को प्रसन्न करने के लिए ओम शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करना और शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना लाभकारी माना गया है। साथ ही काले तिल, उड़द की दाल या काले वस्त्र का दान करने से नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं। यह समय आत्मचिंतन और अधूरे कार्य पूरे करने का है।

मेष राशि

जातकों के लिए यह समय राहत देने वाला साबित हो सकता है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में सुधार होगा और फालतू खर्चों पर नियंत्रण आएगा। पुराने कर्ज से मुक्ति मिलने के संकेत हैं। रुके हुए कार्य पूरे होने लगेंगे। मेहनत का सकारात्मक फल मिलने की संभावना है।

सिंह राशि

जातकों को करियर और व्यापार में लाभ मिल सकता है। लंबे समय से चली आ रही बाधाएं दूर होंगी। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। संतान पक्ष से भी अच्छी खबर मिल सकती है।

धनु राशि

यह परिवर्तन मानसिक और शारीरिक तनाव से राहत देने वाला रहेगा। व्यापार से जुड़ी समस्याएं सुलझ सकती हैं और निवेश में लाभ के योग बन रहे हैं। नौकरी में मनचाही पोस्टिंग या ट्रांसफर संभव है। माता के स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिलेगा और शत्रुओं पर विजय प्राप्त हो सकती है।