हिमाचल प्रदेश में आर्थिक दबाव के चलते मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने समेत मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों की सैलरी का एक हिस्सा 6 महीने के लिए टालने का फैसला किया है. हालांकि, ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारियों को पूरी सैलरी मिलेगी. वहीं सरकार ने मेडिकल स्टाफ, आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं सहित कई वर्गों के मानदेय में बढ़ोतरी की है. विधायक योजनाओं की सीमा भी बढ़ाई गई है. सरकार का कहना है कि हालात सुधरने पर रोकी गई राशि वापस दी जाएगी.

हिमाचल प्रदेश गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है. इस चुनौती से निपटने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अगले छह महीनों के लिए राजनीतिक कार्यपालिका और वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन के एक हिस्से में अस्थायी कटौती की घोषणा की है.

हिमाचल प्रदेश गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. ऐसे में सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राजनीतिक कार्यपालिका और वरिष्ठ नेताओं के वेतन के एक हिस्से में अस्थायी देरी की घोषणा की. इस फैसले के तहत अगले 6 महीनों के लिए मुख्यमंत्री के अपने वेतन का 50 प्रतिशत, उपमुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों के वेतन का 30 प्रतिशत और विधायकों के वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा स्थगित किया जाएगा.

सुखू ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश करते हुए ये घोषणा की. यह घोषणा राजस्व घाटा अनुदान (revenue deficit grant) के बंद होने के बाद की गई है. इससे राज्य के वित्त पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है. बाद में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि हिमाचल के सीएम ने कहा कि ये कदम अस्थायी है और आश्वासन दिया कि वित्तीय स्थिति में सुधार होते ही रोकी गई राशि लौटा दी जाएगी.

बोर्ड और निगम के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और उपाध्यक्षों के साथ ही सलाहकारों के लिए 20 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की गई है. अधिकारियों में मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, पुलिस महानिदेशक और अतिरिक्त डीजीपी पर 30 प्रतिशत की कटौती लागू होगी.

इसके अलावा, सेक्रेटरी, विभागों के प्रमुख, IG, DIG, SSP और उनके बराबर के रैंक वाले अधिकारियों की सैलरी में 20 प्रतिशत की देरी होगी, जबकि ग्रुप A और ग्रुप B के अधिकारियों की सैलरी में छह महीने के लिए 3 प्रतिशत की देरी होगी. सुखू ने कहा कि ग्रुप C और ग्रुप D के कर्मचारियों को इस कदम से छूट दी गई है और उन्हें अपनी पूरी सैलरी मिलती रहेगी.

बताते चले कि आर्थिक संकट के बावजूद सरकार ने कई वर्गों के लिए राहत की घोषणा भी की है. अस्थायी मेडिकल अधिकारियों की सैलरी 33,600 रुपये से बढ़ाकर 40,000 रुपये कर दी गई है. स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और ऑपरेशन थिएटर टेक्नीशियन की सैलरी को एक समान 25,000 रुपये कर दिया गया है. दिहाड़ी मजदूरों की मजदूरी में 25 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. आंगनवाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में 1,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. मिड-डे मील वर्कर, जल रक्षक, पंचायत चौकीदार और अन्य कर्मचारियों के मानदेय में 500 रुपये प्रति माह बढ़ाए गए हैं.

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