राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। राज्यसभा में उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा हुई। मध्य प्रदेश के राज्यसभा सांसद डॉ. उमेशनाथ महाराज (बालयोगी) ने सदन में महाकाल मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) के हवाले करने की मांग की।
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सांसद महाराज ने कहा कि सिंहस्थ 2028 के दौरान उज्जैन में 15 से 16 करोड़ श्रद्धालु आने की संभावना है। इतनी बड़ी संख्या में भक्तों के आने से मंदिर परिसर और आसपास की धार्मिक धरोहरों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। उन्होंने मंदिर की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक, सिक्योरिटी ऑडिट और मजबूत व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया।
डॉ. उमेशनाथ महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक धरोहरों के पुनरुद्धार और सुरक्षा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि महाकाल मंदिर जैसी महत्वपूर्ण ज्योतिर्लिंग स्थल की सुरक्षा अब केंद्रीय बल को सौंपी जानी चाहिए, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो सके।
पहले भी उठ चुकी है मांग
यह पहली बार नहीं है जब महाकाल मंदिर की सुरक्षा को CISF के अधीन करने की मांग की गई है। इससे पहले उज्जैन लोकसभा सांसद अनिल फिरोजिया भी संसद में यह मुद्दा उठा चुके हैं। बढ़ती श्रद्धालु भीड़, भस्म आरती और महाकाल लोक जैसी परियोजनाओं के कारण मंदिर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की लगातार मांग हो रही है।
सिंहस्थ 2028 की तैयारी
सिंहस्थ महाकुंभ 2028 उज्जैन के लिए एक बड़ा धार्मिक आयोजन होगा। इतनी विशाल संख्या में श्रद्धालुओं के आने से क्राउड मैनेजमेंट, ट्रैफिक कंट्रोल और सुरक्षा को लेकर पहले से ही व्यापक तैयारी की जा रही है। सांसद ने सदन से अपील की कि धरोहरों के पुनरुद्धार के साथ-साथ उनकी सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाए। महाकाल मंदिर न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश की आस्था का केंद्र है, इसलिए इसकी सुरक्षा हर स्तर पर सुनिश्चित करना जरूरी है।
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