संसदीय समिति ने कमर्शियल फ्लाइट्स को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश की है. रिपोर्ट में कहा गया कि 50 प्रतिशत कमर्शियल फ्लाइट्स में टेक्नीकल दिक्कतें हैं. पिछले साल किए गए ऑडिट में पैनल को पता चला है कि 754 कमर्शियल फ्लाइट्स में से 377 विमानों में बार-बार तकनीकी खराबी पाई गई. पैनल ने बताया कि सबसे ज्यादा ऑडिट इंडिगो एअरलाइन की फ्लाइट्स का किया गया है और तकनीकी खराबी वाले विमानों की लिस्ट में भी इंडिगो की फ्लाइट्स सबसे ऊपर हैं. 3 फरवरी तक इंडिगो की 405 फ्लाइट्स का ऑडिट हुआ, जिनमें से 148 में तकनीकी खराबी पाई गई.

एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस जैसी एअरलाइंस भी इस मामले में आगे हैं. एअर इंडिया की 166 उड़ानों का ऑडिट हुआ, जिनमें से 137 में बार-बार टेक्नीकल खराबी की समस्या देखी गई. वहीं. एअर इंडिया एक्सप्रस की 101 में से 54 उड़ानों में टेक्नीकल खराबी थी.

पिछले साल अहमदाबाद में हुआ था विमान हादसा

पिछले साल 12 जून को हुए अहमदाबाद एअर इंडिया हादसे के बाद डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने 1-4 जुलाई, 2025 के बीच जिन फ्लाइट्स का ऑडिट किया था, उसका भी जिक्र इस रिपोर्ट में हैं. रिपोर्ट में बोइंग 787 और 777 फ्लाइट्स के पायलटों की ट्रेनिंग में बार-बार होने वाली कमियों का भी जिक्र है. इसके अलावा कम से कम चार इंटरनेशनल फ्लाइट्स में पर्याप्त केबिन क्रू नहीं था. साथ ही फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन के उल्लंघन को लेकर भी रिपोर्ट में गंभीर चिंता जताई गई है.

पैनल ने एअरलाइंस के खिलाफ की गईं नियामक कार्रवाइयों पर भी प्रकाश डाला, जिसमें एअर इंडिया को सुरक्षा नियमों के लिए डीजीसीए की ओर से भेजे गए नौ कारण बताओ नोटिस भी शामिल हैं. इसके अलावा, 2025 के अंत तक एअरलाइंस को 19 नोटिस भेजे गए थे, जिनमें फ्लाइट ड्यूटी नियमों के उल्लंघन, कॉकपिट में अनऑथराइज्ड एंट्री, एक्सपायर्ड इमरजेंसी इक्विपमेंट के साथ विमानों का इस्तेमाल शामिल है.

रिपोर्ट में डीजीसीए में खाली पड़े 48.3 प्रतिशत पदों की ओर इशारा करते हुए एविएशन सेक्टर की कपैसिटी को लेकर चिंता जताई है. रिपोर्ट के अनुसार स्टाफ की शॉर्टेज की वजह से तेजी से बढ़ते एविएशन सेक्टर की प्रभावी ढंग से निगरानी करने की रेग्युलेटर की क्षमता पर सवाल खड़े होते हैं. रिपोर्ट में इन खामियों पर ध्यान दिलाते हुए तत्काल सुधारों की सलाह दी गई है. पैनल ने व्यवस्थागत कमियों को दूर करने, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रवर्तन, बेहतर निगरानी तंत्र और संस्थागत क्षमता में सुधार की मांग की है.

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