समस्तीपुर। बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून को लागू हुए वर्षों बीत चुके हैं, लेकिन समस्तीपुर जिले से आई हालिया तस्वीरों ने सरकार और प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। राजकीय मेले का दर्जा प्राप्त बाबा केवल स्थान मेले में कानून को ठेंगा दिखाते हुए खुलेआम शराब के काउंटर सजाए गए हैं। दिनदहाड़े हो रही इस बिक्री ने नीतीश सरकार के सख्त निर्देशों पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

​इस्तीफे की चर्चा और बेखौफ शराब माफिया

​सूत्रों और हालिया चर्चाओं के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 30 मार्च को संभावित इस्तीफे की खबरों के बीच प्रदेश में एक अलग ही माहौल बन गया है। असामाजिक तत्वों और शराब माफियाओं के बीच यह धारणा घर कर गई है कि बिहार में जल्द ही शराबबंदी कानून खत्म होने वाला है। शायद यही वजह है कि माफिया अब छिपकर नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर काउंटर लगाकर धड़ल्ले से शराब बेच रहे हैं।

​प्रशासनिक चुप्पी पर उठते गंभीर सवाल

​मेले में आए स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अवैध कारोबार अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहा है। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, ड्यूटी पर तैनात जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं। जब इस बारे में प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो अधिकारियों ने कुछ भी बोलने से परहेज किया। यह चुप्पी कहीं न कहीं उनकी कार्यशैली और मंशा पर संदेह पैदा करती है।

​सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया कानून?

​राजकीय मेले जैसे बड़े आयोजनों में जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम होने चाहिए, वहां शराब की दुकानों का सजना यह साबित करता है कि शराबबंदी कानून अब केवल कागजों तक सीमित रह गया है। जमीनी हकीकत यह है कि न तो माफियाओं के मन में कानून का डर है और न ही प्रशासन इसे रोकने के लिए गंभीर नजर आ रहा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकार इन लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई करेगी या बिहार में शराबबंदी महज़ एक चुनावी नारा बनकर रह जाएगी?