टुकेश्वर लोधी, आरंग। नगर पालिका आरंग क्षेत्र में इन दिनों नियम-कायदों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण और प्लाटिंग का खेल धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस प्रशासन की जिम्मेदारी इन अवैध गतिविधियों को रोकने की है, वही अब “मौन समर्थन” और “संरक्षण” देने के आरोपों के घेरे में है।
पिछले कुछ समय से आरंग में नियमितीकरण, नामांतरण और अन्य तकनीकी कारणों का हवाला देकर निर्माण कार्यों पर कड़ाई से रोक लगाई गई थी, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पालिका प्रशासन दोहरी नीति अपना रहा है। प्रभावशाली लोगों और बड़े भू-माफियाओं द्वारा अवैध कॉलोनियों में धड़ल्ले से जमीन की खरीदी-बिक्री और निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। सूत्रों से पता चला है कि आरंग नगर पालिका अंतर्गत वार्ड नं.01,02,06,13,15, और वार्ड नं. 17 में धड़ल्ले से अवैध प्लाटिंग का कारोबार फल फूल रहा है। साथ ही वार्ड नंबर 16 में शासकीय जमीनों की खरीदी बिक्री खुलेआम जारी है।


नगर पालिका प्रशासन द्वारा बाकायदा यहां भवन निर्माण के लिए NOC दिया जा रहा है। साथ ही टैक्स लगवाने के लिए अवैध वसूली भी की जा रही है। प्रशासन की नाक के नीचे हो रहे इन कार्यों पर अधिकारी आँखें मूंदे बैठे हैं। जहाँ एक ओर रसूखदारों को खुली छूट है, वहीं दूसरी ओर अपना छोटा सा आशियाना बनाने वाले गरीब परिवारों पर पालिका का दस्ता तुरंत कार्रवाई करने पहुँच जाता है। मामूली कमी पाए जाने पर भी उनके काम रुकवा दिए जाते हैं।

नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली कई ऐसी कॉलोनियां जिन्हें पूर्व में ‘अवैध’ घोषित किया गया था, वहां अब फिर से रजिस्ट्री और निर्माण का खेल शुरू हो गया है। बिना ले-आउट पास कराए और बिना मूलभूत सुविधाओं के वादे के साथ जमीनें बेची जा रही हैं। पालिका प्रशासन की इस संदिग्ध कार्यप्रणाली से आम जनता पूरी तरह हैरान और आक्रोशित है। लोग दबी जुबान से बोले रहे है कि “जब नियम सबके लिए एक हैं, तो कार्रवाई में यह भेदभाव क्यों..? क्या आरंग नगर पालिका के नियम केवल आम आदमी की जेब ढीली करने के लिए हैं..?”
प्रशासनिक साठगांठ की बू..
शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि बिना मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर अवैध प्लाटिंग और निर्माण संभव नहीं है। पालिका प्रशासन द्वारा दी गई “अघोषित छूट” से न केवल शहर का नियोजन बिगड़ रहा है, बल्कि भविष्य में यहाँ बसने वाले लोगों को बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ेगा।
मुख्य बिंदु जो खड़े करते हैं सवाल
- जिन निर्माण कार्यों पर रोक थी, उन्हें अचानक किस आधार पर शुरू करने की अनुमति मिली..?
- अवैध घोषित कॉलोनियों में जमीन की खरीदी-बिक्री पर अंकुश क्यों नहीं लगाया जा रहा..?
- कार्रवाई केवल कमजोर वर्ग तक ही सीमित क्यों है..?
- अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप करता है या आरंग नगर पालिका की यह “मेहरबानी” इसी तरह जारी रहती है।
जानें क्या है प्लाटिंग के नियम
रायपुर जिले के नगरीय निकायों (नगर निगम, नगरपालिका, नगर पंचायत) में प्लाटिंग और कॉलोनी विकास के लिए कड़े नियम निर्धारित हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध प्लाटिंग पर लगाम लगाने के लिए 2025 और 2026 में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।रायपुर जिले में वैध प्लाटिंग के प्रमुख नियम और प्रक्रियाएँ निम्नलिखित हैं:
- रजिस्ट्री और जमीन का आकार (नया नियम 2025-26)
न्यूनतम आकार: सरकार के नए नियमों के अनुसार, अवैध प्लाटिंग रोकने के लिए 5 डिसमिल (लगभग 2178 वर्ग फीट) से कम की जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी गई है, यदि वह कृषि भूमि का छोटा टुकड़ा है।
डायवर्सन अनिवार्य: किसी भी जमीन पर प्लॉट काटने से पहले उसका भू-उपयोग परिवर्तन (Land Diversion) कराना अनिवार्य है। कृषि भूमि को आवासीय या व्यावसायिक में परिवर्तित कराए बिना प्लाटिंग करना अवैध है।
- कॉलोनी विकास की अनुमति (Colonizer License)
लाइसेंस: प्लाटिंग करने वाले व्यक्ति या संस्था के पास नगर पालिक निगम या संबंधित निकाय से कालोनाइजर का लाइसेंस होना अनिवार्य है।
ले-आउट पास (Layout Approval): टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) विभाग से नक्शा या ले-आउट पास कराना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। इसमें सड़कों की चौड़ाई, पार्क के लिए जगह और ड्रेनेज सिस्टम का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
- मूलभूत सुविधाएं और नियम
सड़क की चौड़ाई: कॉलोनी के अंदर मुख्य और आंतरिक सड़कों के लिए न्यूनतम चौड़ाई के मानकों का पालन करना होता है।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटा: छत्तीसगढ़ नगर पालिका (कालोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण, निर्बन्धन तथा शर्तें) नियम के तहत, कुल विकसित भूखंडों का 15 प्रतिशत क्षेत्र आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए आरक्षित करना अनिवार्य है।
बंधक (Mortgage) नियम: विकास कार्य सुनिश्चित करने के लिए कालोनाइजर को कॉलोनी के कुछ प्लॉट संबंधित नगरीय निकाय के पास बंधक रखने होते हैं। विकास कार्य (सड़क, बिजली, पानी, नाली) पूरे होने के बाद ही इन्हें मुक्त किया जाता है।
- आवश्यक दस्तावेज (Checklist)
नगर निगम रायपुर और अन्य निकायों में आवेदन के लिए ये दस्तावेज जरूरी हैं:
खसरा, बी-1 और पांच साला खसरा।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से स्वीकृत ले-आउट।
पर्यावरण विभाग और नजूल विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC)।
कॉलोनी विकास शुल्क का भुगतान रसीद।
- अवैध प्लाटिंग पर दंडात्मक कार्रवाई
फरवरी 2026 के नए निर्देशों के अनुसार, अवैध कॉलोनी निर्माण या बिना अनुमति प्लाटिंग करने पर प्रशासन काफी सख्त है।
सजा: अवैध प्लाटिंग करने वालों को 3 से 7 साल तक की जेल हो सकती है।
जुर्माना: भारी आर्थिक दंड का प्रावधान है।
बुलडोजर कार्रवाई: नगरीय निकाय बिना अनुमति वाले निर्माणों को ध्वस्त करने और संबंधित भूमि को राजसात (सरकारी कब्जे में लेना) करने का अधिकार रखते हैं।

क्या कहते हैं जिम्मेदार..
इस पूरे मामले में मुख्य नगर पालिका अधिकारी आरंग शीतल चंद्रवंशी ने बताया कि अवैध प्लाटिंग में 19 लोगों की सूची है, जिनके विरुद्ध पूर्व प्रकरण दर्ज है। वर्तमान में नगर पालिका प्रशासन को अवैध प्लाटिंग की शिकायत नहीं मिली है। नगर पालिका द्वारा किसी को संरक्षण नहीं दिया जा रहा है। ये सब झूठी बाते है। अगर कही ऐसा हो रहा है तो जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।

