नई दिल्ली। मरीजों के अधिकारों को लेकर एक अहम फैसले में दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने फोर्टिस फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजन ढल अस्पताल को घोर मेडिकल लापरवाही का दोषी ठहराया है। आयोग ने अस्पताल को मृत मरीज के बेटे को 58 लाख रुपये से अधिक मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला वर्ष 2014 का है, जब वसंत विहार स्थित कटवरिया सराय गांव के निवासी सचिन ने अपने पिता सुरेश कुमार की मौत के बाद शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अस्पताल की लापरवाही के कारण उनके पिता की जान गई।
आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि इलाज में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके चलते मरीज की मृत्यु हुई। इसी आधार पर अस्पताल को दोषी मानते हुए यह भारी भरकम मुआवजा देने का निर्देश दिया गया।
जानें पूरा मामला क्या था
मामले के अनुसार, सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद भर्ती मरीज सुरेश कुमार को अस्पताल में लंबे समय तक रहने के दौरान ग्रेड-IV डेक्यूबिटस अल्सर (बेडसोर) हो गए थे। यह गंभीर स्थिति मानी जाती है, जिसके लिए विशेष उपचार की आवश्यकता होती है। एक प्लास्टिक सर्जन ने मरीज के इलाज के लिए VAC (Vacuum Assisted Closure) ड्रेसिंग की सलाह दी थी, जो ऐसे गंभीर घावों के उपचार का मानक तरीका माना जाता है। हालांकि, आरोप है कि अस्पताल इस जरूरी प्रक्रिया को लागू करने में विफल रहा।
वहीं, वसंत कुंज स्थित अस्पताल ने अपने बचाव में दावा किया कि VAC ड्रेसिंग के लिए आवश्यक उपकरण उनके पास उपलब्ध नहीं थे। साथ ही अस्पताल ने यह भी कहा कि मरीज के परिजनों ने इस प्रक्रिया के लिए न तो सहमति दी और न ही आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल की अध्यक्षता वाले आयोग ने की। आयोग ने अस्पताल की दलीलों को कानूनी तौर पर बेबुनियाद मानते हुए खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि प्रशासनिक मजबूरियां और उपकरणों की कमी किसी मरीज के जीवन के अधिकार के उल्लंघन को सही नहीं ठहरा सकती। गंभीर इलाज को मरीज के परिवार के सदस्यों पर निर्भर बनाना लापरवाही भरा तरीका है। विशेष रूप से, आयोग ने माना कि किसी एक्सपर्ट की सलाह का पालन न करना और गंभीर रूप से बीमार मरीज को समय से पहले छुट्टी दे देना एक व्यवस्थागत विफलता थी। इन सभी तथ्यों को देखते हुए आयोग ने निजी अस्पताल को आदेश दिया कि शिकायतकर्ता को 58 लाख रुपये का मुआवजा तुरंत भुगतान किया जाए।
2 महीने में भुगतान नहीं करने पर 6% सालाना दर से ब्याज
आयोग ने राशि का विवरण वेरिफाइड मेडिकल खर्च की भरपाई के लिए: 47,74,467 रुपये ,दर्द, तकलीफ और मानसिक पीड़ा के मुआवजे के तौर पर: 10,00,000 रुपये ,मुकदमेबाजी के खर्चों के लिए: 50,000 रुपये आयोग ने स्पष्ट किया कि कुल राशि का भुगतान 22 मई 2026 तक किया जाना अनिवार्य है। अगर अस्पताल इस समयसीमा के भीतर भुगतान नहीं करता है, तो आयोग ने 6% सालाना की दर से ब्याज लगाने का प्रावधान रखा है।
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