पटना। बिहार में अपनी सियासी जमीन को पुनर्जीवित करने के लिए कांग्रेस ने संगठन के स्तर पर एक बड़ा और साहसिक फेरबदल किया है। सोमवार को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बिहार के 53 संगठनात्मक जिलों के लिए नए अध्यक्षों की सूची जारी की। इस सूची की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें 43 नए चेहरों को मौका दिया गया है, जबकि केवल 10 पुराने नामों पर ही भरोसा जताया गया है। यह पूरी कवायद संगठन सृजन अभियान के तहत की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक कांग्रेस को धारदार बनाना है।

ब्राह्मण और यादवों पर सबसे ज्यादा भरोसा

  • इस बार की सूची में कांग्रेस अपने पारंपरिक सामाजिक आधार की ओर लौटती दिख रही है। जातिगत आंकड़ों पर गौर करें तो पार्टी ने ब्राह्मण और यादव समुदाय के नेताओं को सबसे अधिक तरजीह देते हुए 10-10 जिलों की कमान सौंपी है। इसके अतिरिक्त:
  • मुसलमान: 07 जिले
  • दलित: 07 जिले
  • भूमिहार: 07 जिले
  • राजपूत: 05 जिले
  • कुल 53 जिलों में से 38 की जिम्मेदारी सवर्ण, दलित और अल्पसंख्यक नेताओं को देकर कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह अपने पुराने वोट बैंक को गोलबंद करने की रणनीति पर काम कर रही है।

राजधानी में सवर्णों और सिखों को कमान

पटना के संगठनात्मक ढांचे में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पटना ग्रामीण-1 की जिम्मेदारी चंदन कुमार (भूमिहार) को दी गई है, जबकि पटना ग्रामीण-2 में गुरजीत सिंह (सिख समुदाय) को रिपीट किया गया है। वहीं, पटना शहरी जिलाध्यक्ष के रूप में कुमार आशीष (कायस्थ) को नियुक्त किया गया है।

अनुभव और शक्ति का मेल: पद का मोह छोड़ संगठन पर ध्यान

पार्टी ने इस बार पद के पुराने कद को दरकिनार कर मजबूत नेतृत्व को प्राथमिकता दी है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण औरंगाबाद है, जहां दो बार के विधायक रह चुके आनंद शंकर को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह खगड़िया में पूर्व राष्ट्रीय सचिव चंदन यादव को कमान दी गई है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि जो नेता राष्ट्रीय स्तर पर काम कर चुके हैं, वे जमीनी स्तर पर संगठन को बेहतर ढंग से सक्रिय कर पाएंगे।

संगठन की मजबूती पर जोर

2026 के राजनीतिक परिवेश में यह फेरबदल पार्टी की तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह के नेतृत्व में पार्टी अब जिलाध्यक्षों को और अधिक स्वतंत्र अधिकार देने जा रही है। लक्ष्य स्पष्ट है पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को इतना मजबूत करना कि वह सीधे जनता से जुड़ सके और आगामी चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर सके।