लखनऊ. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने व्यापार जगत को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने सरकार की नीतियों को लेकर उन्हें घेरा है. अखिलेश का कहना है कि शासन की गलत नीतियों की वजह से व्यापार जगत में अस्थिरता है. जिसके चलते व्यापारिक प्रतिस्पर्धा प्रतिद्वंदिता में बदल रही है. इसका असर देश की जनता को भुगतना पड़ रहा है. अखिलेश ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया है.

अखिलेश ने लिखा है कि ‘प्रिय भारतीय व्यापार जगत्, भाजपा के पक्षपात के ATM की वजह से देश के व्यापार जगत् में भूचाल आ गया है. किसी को वैध तरीक़े से हासिल किये गए सौदे से वंचित किया जा रहा है. जिसकी वजह से वो खुलकर-लिखकर विरोध कर रहे हैं और उनके विरोध को देश के दूसरे बड़े कारोबारी लिखा-पढ़ी में आगे बढ़ा रहे हैं. भाजपा की एकतरफ़ा नकारात्मक नीतियों की वजह से एक तो देश में असंतुलन हो रहा है, दूसरी तरफ विदेशी निवेशक विश्वास खो रहे हैं क्योंकि उनको लगता है कि जब भारतीय कारोबारियों के बीच ही इतने बड़े स्तर पर भेदभाव किया जा रहा है, तो हम तो विदेशी हैं, हमको न जाने कब इन unfair trade practices का सामना करना पड़े.’

इसे भी पढ़ें : ‘अगर स्टूल भी छिन गया तो कहां जाएंगे…’, केशव मौर्य के बयान पर अखिलेश का पलटवार, कहा- जिनका स्वयं का कोई ‘मान’ नहीं उनके साथ हमें बेहद सहानुभूति

सपा चीफ ने आगे लिखा कि ‘इन हालातों में भारतीय व्यापार जगत् के बीच कटुता का माहौल बनने की आशंका जन्म ले रही है, जो भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए हर तरह से बेहद हानिकारक है. सच्चाई तो ये है कि ऐसे में हमें लोहिया जी की वो बात याद करनी चाहिए जिसका मर्म ये था कि पक्षपात के कारण उपजे असमान अवसरों की वजह से जो व्यापारिक प्रतिस्पर्धा, प्रतिद्वंद्विता में बदल जाती है, उसकी वजह से ‘पूंजीपति ही पूंजीपति’ को खत्म करने लगता है. जिसका नुकसान न सिर्फ पूंजीपतियों, कारोबारियों, व्यापारियों को होता है बल्कि देश की जनता को भी होता है क्योंकि ऐसे में संसाधन एक-दूसरे को खत्म करने में लगने लगते हैं, न कि विकास-तरक्की के लिए उद्योग-धंधों को आगे बढ़ाने में. इससे कच्चे माल की खपत घटती है और काम के अवसर भी. संबंधित छोटे उद्योग भी इससे प्रभावित होते हैं और सबसे ज्यादा रोजगार देनेवाले MSME का भट्टा बैठ जाता है, साथ ही देश की इंटरनेशनल इमेज पर बहुत बुरा असर पड़ता है. इससे मंदी, बेरोजगारी और बेकारी का संकटकाल और भी गहरा जाता है, आजकल ऐसा ही दौर चल रहा है. ट्रिलयन डॉलर की इकॉनमी दो-तीन लोगों का पक्षपात करने से नहीं बनेगी. हम पक्षपात झेल रहे व्यापार-जगत् से कहते हैं कि वो निराश न हों क्योंकि ‘बुरे दिन जानेवाले हैं’. भाजपा जाए तो समान अवसर आए.’