Hanuman Janmotsav 2026 : हनुमान जन्मौत्सव के मौके पर देशभर में बजरंगबली के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, लेकिन कर्नाटक के हंपी का यंत्रोद्धारक हनुमान मंदिर अपनी अनोखी संरचना और रहस्यमयी मान्यताओं के कारण खास पहचान रखता है. ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में लगातार छह महीने तक प्रतिदिन तीन बार यंत्रोद्धारक हनुमान स्तोत्र का जाप करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. माना जाता है कि यही क्षेत्र प्राचीन किष्किंधा नगरी था. जहां कभी वानरों का विशाल साम्राज्य हुआ था और यही यह भी कहा जाता है कि वनवास के दौरान पहली बार भगवान श्री राम की मुलाकात हनुमान जी से इसी क्षेत्र में हुई थी. आज भी यहां की गुफाएं और पहाड़ियां उस इतिहास की झलक दिखाती हैं.

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता

यहां विराजमान भगवान हनुमान की दुर्लभ प्रतिमा है. ग्रेनाइट पत्थर पर बनी यह मूर्ति ध्यान मुद्रा में पद्मासन में स्थित है और श्रीचक्र यानी यंत्र के केंद्र में स्थापित है. मूर्ति के चारों ओर 12 बंदरों की आकृतियां उकेरी गई हैं, जो एक-दूसरे की पूंछ पकड़े हुए हैं. इन्हें 12 दिनों की विशेष प्रार्थना का प्रतीक माना जाता है.

मूर्ति की विशेषता

प्रतिमा के साथ एक षटकोणीय ताबीज भी बना है, जिसमें बीजाक्षर अंकित हैं. इन्हीं बीजाक्षरों पर महान संत श्री व्यासराय ने तप और प्रार्थना की थी. पूरी आकृति लगभग 8 फीट ऊंचे सपाट शिलाखंड पर उकेरी गई है. अपने दुर्लभ और आश्चर्य कर देने वाली है.

चढ़नी पड़ती हैं 570 सीढ़ियां

यह मंदिर तुंगभद्रा नदी के किनारे एक पहाड़ी पर स्थित है, जहां पहुंचने के लिए करीब 570 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. पास ही कोदंडराम मंदिर स्थित है, जिसे भगवान राम और हनुमान के मिलन का प्रतीक माना जाता है.