रायपुर। राजधानी रायपुर में करोड़ों की जमीन बेचने के नाम पर धोखाधड़ी के मामले में कोर्ट ने आरोपी वैष्णव तांडी की अग्रिम जमानत खारिज कर दी है। आरोपी और उनके साथी रूपनाथ साहू पर अवंति विहार निवासी विनीत जैन से 36 लाख रुपये की ठगी का आरोप है। अब पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए आगे बढ़ सकती है।

क्या था पूरा मामला?
पीड़ित विनीत जैन ने शिकायत में बताया कि आरोपी वैष्णव तांडी और रूपनाथ साहू ने मिलकर ग्राम कोलर स्थित खसरा नंबर 161/5 की 30,000 वर्गफुट कृषि भूमि को अपना बताकर 1.80 करोड़ रुपये का सौदा किया। उन्होंने 23 अप्रैल 2025 को इकरारनामे के तहत 35 लाख रुपये अग्रिम राशि चेक के माध्यम से और 4 जून 2025 को 1 लाख रुपये नकद के रूप में आरोपियों को दिए। कुल मिलाकर 36 लाख रुपये लेने के बावजूद आरोपियों ने जमीन की रजिस्ट्री कराने में लगातार टालमटोल किया।
कुछ समय बाद, जब विनीत ने जमीन के बारे में सार्वजनिक सूचना (Public Notice) प्रकाशित करवाई, तब उन्हें पता चला कि यह जमीन वास्तव में विवादित है। आरोपी रूपनाथ साहू के भाई ललित कुमार साहू ने भी आपत्ति दर्ज करवाई और बताया कि जमीन का नक्शा त्रुटिपूर्ण तरीके से बंटा हुआ है तथा मामला वर्तमान में राजस्व न्यायालय में लंबित है।
जल्द हो सकती है गिरफ्तारी!
सिविल लाइन्स पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और 3(5) (साझा मंशा) के तहत अपराध दर्ज किया। मामले की विवेचना सहायक उपनिरीक्षक संतोष यादव को सौंपी गई है। अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद अब पुलिस आरोपी वैष्णव तांडी और रूपनाथ साहू की गिरफ्तारी के लिए और दबाव बना सकती है।
मामले में शासन की ओर से पैरवी की गई, जबकि आरोपी की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र कुमार ताम्रकार ने पक्ष रखा। इस मामले ने राजधानी रायपुर में जमीन खरीद-बिक्री की धोखाधड़ी के मामलों पर एक बार फिर से सवाल खड़ा कर दिया है और प्रशासन की तत्परता पर लोगों की नजरें टिकी हैं।
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